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रिपोर्टर- दीपक नौटियाल

स्थान- उत्तरकाशी


जोशीमठ जैसी आपदा से कैसे निपटा जाता है कैसे हम भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को पेड़ पोधे लगाकर रोका जा सकता है ये कर दिखाया है उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय में तांबा खाणी पर्वत के नीचे निवास करने वाले पर्यावरण प्रेमी प्रताप पोखरियाल ने बहुत ही सादगी भरे जीवन जीने वाले जो ये सक्स जो आपके टीवी स्क्रीन पर हैं वो हैं प्रताप पोखरियाल वनों से प्रेम होने के कारण शहर के लोग इन्हें पर्यावरण प्रेमी के नाम जे पुकारते हैं इन्होंने जनपद उत्तरकाशी में बिना किसी आर्थिक सहायता के लगभग 6वन एवं सरकारी विभागों में हर्बल गार्डन विकसित किये हैं सन 203मे जनपद मुख्यालय उत्तरकाशी में हुए भयंकर भूस्खलन जिसमें कि शहर से लगे हुए वरूणावत पर्वत से भयंकर भूस्खलन सुरू हो गया था


जिसके कारण काफी होटल एवं आवासीय भवन दब गये थे उसके बाद पर्यावरण प्रेमी प्रताप पोखरियाल ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के आसपास लाखों फलदार एवं औषधीय पोधों का रोपण किया जिसमें कि पहाड़ों में पानी के मुख्य श्रोत बांज देवदार सहित लाखों प्रजाती के पोधे लगाये जिसके कारण आज इस जगह पर बहुत बड़ा जंगल विकसित हो गया है और भूस्खलन भी रुक गया है प्रताप पोखरियाल का कहना है कि जिस प्रकार आज जोशीमठ क्षेत्र में भूस्खलन हो रहा है उसका मुख्य कारण वहां पर पेड़ पोधों का नहीं होना है

अगर वहां पर समय से पेड़पौधे रोपित किये जाते तो आज वहां ये हाल नहीं होते दिनभर पर्यावरण के सेवा में लगे इस पर्यावरण प्रेमी को दुख है कि आज तक सरकार द्वारा हमेशा उनकी हमेशा अनदेखी की गयी है न तो उनको आजतक वो सम्मान मिल पाया है जिसके वह हकदार हैं कोविड काल में उन्होंने इसी वन से जड़ीबूटियां कठ्ठी कर हजारों लीटर काढ़े का निर्माण करवाया था जिससे कि लाखों लोगों को फायदा पहुंचा था पर उनका कहना है कि सरकार की अनदेखी से उनको कोई फ्रक नहीं पड़ता है और वहां अपना जीवन इन पेड़ पोधो को समर्पित कर चुके हैं।



