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लोकेशन – काशीपुर
रिपोर्ट – रफी खान

राज्य में सर्द हवाओं में भी राजनीती का पारा लगातार गर्मी बढ़ाए हुए हैं | राजनीतिक दांवपेच में जहां एक खिलाड़ी दूसरे को पटखनी दे कर बाजी मारने में जुटे हैं, तो वहीं काशीपुर में बुआ और बबुआ का सियासी खेल सुर्खियों में बना हुआ है।


बता दें पिछले दिनों काशीपुर में चार बार से विधायक चले आ रहे हैं हरभजन सिंह चीमा के पुत्र त्रिलोक सिंह चीमा को बीजेपी हाईकमान द्वारा काशीपुर से टिकट दिए जाने के बाद विधानसभा में काफी आक्रोश पनपा | जिसके बाद स्थानीय संगठन की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले कई दर्जन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी से अपने इस्तीफे देकर हाईकमान को चेताया कि यदि टिकट में बदलाव नहीं किया गया तो काशीपुर से बीजेपी के नेता राम मेहरोत्रा या फिर नगर निगम महापौर उषा चौधरी में से किसी एक को निर्दलीय मैदान में उतारा जायेगा।


जहां अभी भी इस पर असमंजस बना हुआ है, तो वहीं काशीपुर से बीजेपी विधायक चले आ रहे हरभजन सिंह चीमा ने मेयर उषा चौधरी को अपनी बहन बताते हुए कहा कि वह पिछले 30 सालों से मेरी बहन बनी हुई है और मुझे उम्मीद है कि वह अपनी नाराजगी दूर कर हमारे साथ खड़ी होंगी | वहीं उनके पुत्र बीजेपी प्रत्याशी त्रिलोक सिंह चीमा का भी यही कहना है कि हम अपनी बुआ को जल्द मना लेंगे।

अब काशीपुर के सामने आया यह बुआ और बबुआ का खेल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है जो आने वाले वक्त में क्या गुल खिला पाएगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन इतना जरूर है कि भारतीय जनता पार्टी हाई कमान अगर अपने प्रत्याशी त्रिलोक सिंह चीमा की बुआ समेत अन्य समर्थकों को मनाने में नाकाम हुई तो बीजेपी की बुनियाद 2022 में काशीपुर से खिसक सकती है।



