नंदा देवी राजजात को लेकर असमंजस, 2026 में बड़ी जात या लोक जात पर टिकी निगाहें

नंदा देवी राजजात को लेकर असमंजस, 2026 में बड़ी जात या लोक जात पर टिकी निगाहें

स्थान : चमोली
रिपोर्टर : विनोद पांडे

उत्तराखंड के चमोली जिले में विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात को लेकर इस बार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नंदा देवी राजजात का आयोजन परंपरागत रूप से 12 वर्षों के अंतराल में होता है, जबकि प्रतिवर्ष छोटी जात का आयोजन भी किया जाता है।

वर्ष 2014 में आयोजित नंदा देवी राजजात के बाद अगली बड़ी जात वर्ष 2026 में प्रस्तावित थी। हालांकि, कुछ समितियों की ओर से इस यात्रा को वर्ष 2027 में आयोजित करने का आह्वान किया गया। इसके बाद यात्रा के आयोजन को लेकर अलग-अलग मत सामने आने लगे।

इसी बीच नंदा देवी बड़ी जात समिति के अध्यक्ष की ओर से इस वर्ष यानी 2026 में ही बड़ी जात आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। समिति की ओर से इसके लिए तैयारियों और आयोजन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है।

बताया जा रहा है कि इस वर्ष नंदा देवी के अवतार लेने और जात की इच्छा प्रकट होने की मान्यता के चलते बड़ी जात के आयोजन की बात सामने आई है। हालांकि, यात्रा के आयोजन को लेकर अभी भी विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

यात्रा को लेकर अंतिम स्थिति नंदा देवी की जात के अंतिम पड़ाव वाण पहुंचने के बाद ही स्पष्ट होने की बात कही जा रही है। इसी पड़ाव के बाद यह तय हो सकेगा कि इस वर्ष बड़ी जात आयोजित होगी या लोक जात के रूप में यात्रा आगे बढ़ेगी।

फिलहाल श्रद्धालुओं की आस्था और देव इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए आयोजन का निर्णय मां नंदा देवी पर छोड़ दिया गया है। भक्तों का कहना है कि जैसी देव इच्छा होगी, उसी के अनुरूप आगे का कार्यक्रम निर्धारित किया जाएगा।

नंदा देवी राजजात केवल धार्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक परंपरा, संस्कृति और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। ऐसे में इस बार आयोजन को लेकर सामने आए मतभेद और अलग-अलग निर्णय अपने आप में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम बन गए हैं।

अब सभी की निगाहें यात्रा के अंतिम पड़ाव वाण पर टिकी हैं। वहीं से बड़ी जात, लोक जात और यात्रा के स्वरूप को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल श्रद्धालु मां नंदा देवी की इच्छा को अंतिम निर्णय मानते हुए यात्रा के अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं।