एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर पूर्व और वर्तमान पालिकाध्यक्ष आमने-सामने

एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर पूर्व और वर्तमान पालिकाध्यक्ष आमने-सामने

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट

मसूरी के एकमात्र म्युनिसिपल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज (एमपीजी कॉलेज) के प्रांतीयकरण को लेकर नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजे जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रांतीयकरण के मुद्दे पर अब पूर्व और वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष आमने-सामने हैं। दोनों पक्षों की अलग-अलग मांगों और आशंकाओं के चलते कॉलेज का प्रांतीयकरण मसूरी में चर्चा का विषय बना हुआ है।

कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर नगर पालिका परिषद मसूरी की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसे शासन को भेजा गया है। इस प्रस्ताव के खिलाफ पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि न्यायालय ने उन्हें इस मामले में पीड़ित पक्ष न मानते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

याचिका खारिज होने के बाद भी प्रांतीयकरण को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ है। वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। पालिका का पक्ष है कि कॉलेज के प्रांतीयकरण से संस्थान को बेहतर संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं तथा इसके भविष्य को अधिक मजबूत किया जा सकता है।

वहीं, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि वह कॉलेज के प्रांतीयकरण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि एमपीजी कॉलेज की करोड़ों रुपये की भूमि के हस्तांतरण के बाद उसके दुरुपयोग या बंदरबांट की स्थिति पैदा हो सकती है।

अनुज गुप्ता ने मांग की कि यदि कॉलेज का प्रांतीयकरण किया जाता है तो कॉलेज की पूरी भूमि शासन को स्थानांतरित की जाए और भूमि के संबंध में स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कॉलेज की संपत्ति का इस्तेमाल किसी निजी हित या चहेते लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने भूमि की सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने की मांग की।

पूर्व पालिकाध्यक्ष ने कॉलेज में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि प्रांतीयकरण की प्रक्रिया में कॉलेज के मौजूदा कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शासन स्तर पर ठोस निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज में पिछले तीन वर्षों से जिन शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है, उन्हें बकाया वेतन का भुगतान किया जाए और उन्हें कॉलेज में समायोजित किया जाए। अनुज गुप्ता ने दावा किया कि एमपीजी कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्तियां पूरी पारदर्शिता के साथ की गई थीं और प्रांतीयकरण की स्थिति में उनकी सेवाओं एवं अधिकारों को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर अब वर्तमान पालिका बोर्ड की पहल और पूर्व पालिकाध्यक्ष की आपत्तियों के बीच मामला शासन के स्तर पर पहुंच गया है। एक ओर प्रांतीयकरण को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कॉलेज की भूमि, कर्मचारियों और शिक्षकों के हितों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में शासन के स्तर से होने वाले निर्णय पर मसूरी की नजर बनी हुई है।