
स्थान : रामनगर
ब्योरो रिपोर्ट


पहाड़ों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब मैदानी क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। रामनगर के प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ का पानी मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंचने के बाद मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया है।


बताया जा रहा है कि पिछले दो दिनों से पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब नदी का पानी गर्जिया मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच गया। मंदिर की ओर जाने वाले हिस्से में अब नदी का पानी बह रहा है।



कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से गर्जिया मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ है। मंदिर की सीढ़ियों के आसपास पानी पहुंचने के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही को रोकना पड़ा। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।


मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज पांडे ने बताया कि पहाड़ों में रात से लगातार बारिश हो रही थी और इसका असर सुबह से ही कोसी नदी के जलस्तर पर दिखाई देने लगा था। उन्होंने बताया कि नदी का पानी पहले से बढ़ रहा था, लेकिन मंगलवार से जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई।


पुजारी के मुताबिक बुधवार शाम करीब पांच बजे तक स्थिति काफी गंभीर हो गई और कोसी नदी का पानी मंदिर की ओर पहुंचने लगा। इसके बाद मंदिर तक जाने वाला रास्ता भी प्रभावित हो गया और वहां से नदी का पानी बहने लगा। लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई।

मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बुधवार सुबह से मंदिर को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी भी श्रद्धालु को मंदिर परिसर की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।


मंदिर समिति के अनुसार मौसम साफ होने और कोसी नदी का जलस्तर सामान्य होने के बाद ही मंदिर को दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। परिस्थितियों को देखते हुए मंदिर के सामान्य रूप से खुलने में कम से कम दो से तीन दिन का समय लग सकता है।

लगातार बारिश और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। फिलहाल श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर की ओर जाने से बचें और नदी के बढ़े हुए जलस्तर के बीच किसी तरह का जोखिम न उठाएं।

