मंगलौर-हरिद्वार हाईवे पर करोड़ों की जमीन को लेकर विवाद, जांच के दौरान दोनों पक्ष भिड़े

मंगलौर-हरिद्वार हाईवे पर करोड़ों की जमीन को लेकर विवाद, जांच के दौरान दोनों पक्ष भिड़े

स्थान : रुड़की
ब्योरो रिपोर्ट

मंगलौर-हरिद्वार हाईवे पर करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। दोनों पक्ष विवादित भूमि पर अपना-अपना हक जता रहे हैं। जमीन को लेकर चल रहे विवाद की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ तहसील प्रशासन और चकबंदी विभाग की टीम मौके पर पहुंची और भूमि से संबंधित दस्तावेजों की जांच-पड़ताल शुरू की।

अधिकारियों की टीम मौके पर दस्तावेजों की जांच कर ही रही थी कि इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की होने लगी। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराने का प्रयास किया।

विवाद बढ़ने पर पुलिस ने मौके से तीन लोगों को हिरासत में ले लिया और उन्हें सिविल लाइंस कोतवाली ले जाया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद मौके पर स्थिति को नियंत्रित किया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और जमीन को लेकर दोनों पक्षों के दावों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

वहीं उत्तर प्रदेश में यूपीसीएल के पूर्व अधिशासी अभियंता ऋषिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि उनकी करोड़ों रुपये की जमीन पर कुछ लोग कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2012 से विवादित भूमि पर उनका कब्जा है और जमीन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी उनके पास मौजूद हैं।

ऋषिपाल सिंह का आरोप है कि उन्हें अब तक तहसील या चकबंदी विभाग की ओर से जमीन संबंधी विवाद को लेकर कोई नोटिस नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी एक पक्ष का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह इस मामले की शिकायत जिले के आला अधिकारियों से करेंगे।

जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आने के बाद तहसील प्रशासन और चकबंदी विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। अधिकारियों की ओर से राजस्व अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है, ताकि जमीन के वास्तविक स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट हो सके।

जांच के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद और धक्कामुक्की के बाद पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध तथ्यों और शिकायतों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी जमीन के दस्तावेजों की जांच जारी है।

फिलहाल करोड़ों रुपये की इस बेशकीमती जमीन का वास्तविक हकदार कौन है, यह प्रशासनिक जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जमीन पर कब्जे के आरोप और दोनों पक्षों के दावों के बीच प्रशासन की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।