कावड़ पटरी किनारे 40 बीघा में ‘बगीचा फार्म हाउस’, सिंचाई विभाग ने बताया अवैध

कावड़ पटरी किनारे 40 बीघा में ‘बगीचा फार्म हाउस’, सिंचाई विभाग ने बताया अवैध

स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

पिरान कलियर क्षेत्र में कावड़ पटरी के किनारे कथित तौर पर नियमों और मानकों को ताक पर रखकर विकसित की जा रही ‘बगीचा फार्म हाउस’ कॉलोनी को लेकर मामला गरमा गया है। यहां बड़े-बड़े लग्जरी विला और फार्म हाउस तैयार किए जा रहे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद सिंचाई विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, कावड़ पटरी के किनारे करीब 40 बीघा जमीन में कॉलोनी विकसित की जा रही है। बताया जा रहा है कि इसमें करीब 10 बीघा हिस्से में रेरा से अप्रूवल लेकर प्लॉटिंग का काम किया गया है। वहीं, आरोप है कि बाकी हिस्से में बिना आवश्यक स्वीकृतियों के फार्म हाउस और विला का निर्माण कराया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने इसे अवैध बताया है। उनका कहना है कि कॉलोनी तक पहुंचने के लिए कालोनाइजर की ओर से बनाया गया पक्का रास्ता सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली नहर की भूमि पर है।

अधिशासी अभियंता के अनुसार सिंचाई विभाग की ओर से इस रास्ते के निर्माण अथवा संबंधित निर्माण कार्य के लिए कोई एनओसी जारी नहीं की गई है। विभाग के रिकॉर्ड में भी कॉलोनी के लिए उक्त स्थान पर रास्ता दर्ज नहीं होने की बात कही गई है।

सिंचाई विभाग ने कार्रवाई करते हुए कालोनाइजर को कारण बताओ नोटिस और ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी कर दिया है। विभाग की ओर से जल्द ही सिंचाई विभाग की भूमि पर बनाए गए पक्के रास्ते को ध्वस्त किए जाने की बात कही गई है।

वहीं, सिंचाई विभाग ने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) को भी औपचारिक पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया है। पत्र में कथित तौर पर कॉलोनी के लिए वैध रास्ता नहीं होने और नहर किनारे निर्माण के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों के पूरा नहीं किए जाने की जानकारी दी गई है।

मामले ने सरकारी विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज नहीं था और विभाग ने कोई एनओसी जारी नहीं की थी, तो कावड़ पटरी पर इतना बड़ा पक्का रास्ता कैसे तैयार हो गया। साथ ही करीब 40 बीघा क्षेत्र में कथित निर्माण कार्य लंबे समय तक चलता रहा और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी कब हुई, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल नोटिस जारी होने के बाद संबंधित लोगों में हलचल मची हुई है। अब नजर सिंचाई विभाग और एचआरडीए की आगे की कार्रवाई पर है। विभाग की ओर से पक्के रास्ते के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।