इंसुलिन के लिए भटक रहा लाचार पिता, मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार

इंसुलिन के लिए भटक रहा लाचार पिता, मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार

स्थान : रूड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

रुड़की के मंगलौर क्षेत्र के मोहल्ला टोली निवासी एक परिवार अपने दो बच्चों के इलाज को लेकर बेहद परेशान है। बताया जा रहा है कि परिवार के दोनों बच्चे टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं और उन्हें प्रतिदिन कई बार इंसुलिन की जरूरत पड़ती है। आर्थिक तंगी से जूझ रहा पिता अब बच्चों के लिए इंसुलिन की व्यवस्था करने को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है।

पीड़ित पिता का कहना है कि गरीबी के बावजूद वह अब तक किसी तरह अपने बच्चों के लिए महंगी इंसुलिन का इंतजाम करता रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण लगातार महंगी दवा खरीदना उसके लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे में सरकारी अस्पताल से इंसुलिन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वहां भी उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

परिवार के अनुसार मंगलौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों के लिए आवश्यक इंसुलिन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। पिता का कहना है कि बच्चों को नियमित रूप से इंसुलिन की जरूरत होती है और दवा नहीं मिलने से उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है।

पीड़ित परिवार की मदद के लिए क्षेत्रीय विधायक की ओर से भी प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इसके बावजूद परिवार को नियमित रूप से इंसुलिन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। अब पिता के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने दोनों बच्चों के इलाज को जारी रखने की है।

पीड़ित पिता का दावा है कि मंगलौर के अलावा रुड़की, हरिद्वार और देहरादून के सरकारी अस्पतालों में इंसुलिन उपलब्ध है। हालांकि वहां से कथित तौर पर यह कहकर दवा देने से मना किया जा रहा है कि मरीज को अपने क्षेत्र के सरकारी अस्पताल से ही इंसुलिन लेनी होगी।

लगातार अस्पतालों के चक्कर लगाने और इंसुलिन नहीं मिलने से परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिता का कहना है कि वह अपनी सीमित आर्थिक क्षमता के बावजूद बच्चों की जरूरत पूरी करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब उसके लिए बाहर से लगातार इंसुलिन खरीदना संभव नहीं है।

मीडिया के माध्यम से पीड़ित पिता ने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके दोनों बच्चों के लिए नियमित रूप से इंसुलिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि इलाज के अभाव में उनकी जिंदगी खतरे में न पड़े।

परिवार की इस परेशानी ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर गंभीर बीमारियों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग मामले का संज्ञान लेकर बच्चों के लिए नियमित इंसुलिन की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।