
स्थान : पौड़ी गढ़वाल
ब्यूरो रिपोर्ट


जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में सोमवार को 28 शिकायतें पहुंचीं। शिकायतों ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इनमें कई समस्याएं कुछ दिनों या महीनों से नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित हैं। सतपुली-पैडुल मोटर मार्ग पर सड़क कटिंग का मुआवजा दस साल से अधिक समय से अटका है, जबकि बल्ली गांव के ग्रामीण अब भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।


जनता दर्शन में आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप ने अधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए। बल्ली गांव में पेयजल संकट की शिकायत पर उन्होंने दो दिन के भीतर पाइपलाइन दुरुस्त कराने और तब तक टैंकर के माध्यम से ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। हालांकि, यहां सवाल यह भी है कि जिस समस्या के समाधान के लिए दो दिन की समयसीमा तय की जा सकती है, वह समस्या विभागीय स्तर पर पहले ही क्यों नहीं पकड़ी गई।



भिताईं मल्ली गांव में रास्ते पर झाड़ियों के फैल जाने की शिकायत भी जनता दर्शन में पहुंची। इस पर मौके पर ही बुशकटर उपलब्ध कराने की कार्रवाई की गई। त्वरित कार्रवाई निश्चित रूप से राहत देने वाली है, लेकिन यह मामला सरकारी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों को सामान्य आवागमन के रास्ते साफ कराने के लिए जनता दर्शन तक पहुंचने की जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल व्यवस्था के सामने है।

सबसे पुराना मामला सतपुली-पैडुल मोटर मार्ग पर सड़क कटिंग के मुआवजे का सामने आया। ग्रामीणों का मुआवजा दस साल से अधिक समय से लंबित बताया गया। आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को मामले को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं। इतने लंबे समय तक मुआवजे का मामला लंबित रहने से राजस्व, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।



जनता दर्शन में तहसील मार्ग पर गड्ढों, निराश्रित पशुओं, खराब स्ट्रीट लाइटों, पेयजल पाइपलाइन, मंदिर की क्षतिग्रस्त दीवार और आवासीय भवनों पर मंडरा रहे खतरे जैसी शिकायतें भी सामने आईं। इन शिकायतों से स्पष्ट है कि लोगों की रोजमर्रा की मूलभूत समस्याओं को लेकर विभागीय निगरानी अभी भी अपेक्षित स्तर पर प्रभावी नहीं है।
ग्राम कठूड़ में घरों के आसपास भालू की लगातार आवाजाही की शिकायत ने ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने ला दिया। मामले में आयुक्त ने एक सप्ताह के भीतर सोलर लाइट लगाने के निर्देश दिए। वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में रोशनी और सुरक्षा के इंतजाम जरूरी हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे इंतजाम शिकायत सामने आने के बाद ही क्यों किए जाते हैं।



मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान आयुक्त आनंद स्वरूप ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने शिकायतकर्ताओं से फोन पर फीडबैक लेने के निर्देश भी दिए। यह व्यवस्था इस बात की जांच के लिए महत्वपूर्ण है कि विभागीय रिकॉर्ड में निस्तारित दिखाई जा रही शिकायत वास्तव में धरातल पर हल हुई है या नहीं।

जनता दर्शन में सामने आए मामलों से यह भी संकेत मिलता है कि विभागीय स्तर पर नियमित जनसुनवाई और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। यदि ग्रामीणों को सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट और रास्तों जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए बार-बार जनता दर्शन का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, तो स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और संबंधित विभागों की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कुल मिलाकर जनता दर्शन में आई 28 शिकायतें सिर्फ समस्याओं की सूची नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की जमीनी स्थिति का आईना भी हैं। आयुक्त ने अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश जरूर दिए हैं, लेकिन असली चुनौती अब इन निर्देशों को जमीन पर उतारने की है। वर्षों पुराने मामलों का समाधान और शिकायतों के वास्तविक निस्तारण की निगरानी ही तय करेगी कि जनता दर्शन लोगों के लिए स्थायी समाधान का माध्यम बनता है या फिर शिकायतों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का सिलसिला जारी रहता है।

