एसआईआर बैठक में भाजपा विधायक और पूर्व विधायक के बीच नोकझोंक, मुख्यमंत्री धामी ने कहा- कानून हाथ में लेना ठीक नहीं

एसआईआर बैठक में भाजपा विधायक और पूर्व विधायक के बीच नोकझोंक, मुख्यमंत्री धामी ने कहा- कानून हाथ में लेना ठीक नहीं

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान को लेकर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। रुद्रपुर में कुमाऊं कमिश्नर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान भाजपा विधायक शिव अरोड़ा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर गाली-गलौज तक की स्थिति बन गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं और एसआईआर को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान एक बार फिर सामने आ गई।

बताया जा रहा है कि बैठक का आयोजन एसआईआर अभियान से जुड़े विषयों पर चर्चा और संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए किया गया था। इसी दौरान भाजपा विधायक शिव अरोड़ा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच किसी मुद्दे को लेकर कहासुनी शुरू हो गई।

देखते ही देखते दोनों नेताओं के बीच विवाद बढ़ गया और बैठक का माहौल गरमा गया। मौके पर मौजूद लोगों और अन्य अधिकारियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। घटना को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा हो रही है।

एसआईआर को लेकर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस जहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा लगातार प्रक्रिया को पारदर्शी और जरूरी बताते हुए विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच रुद्रपुर की बैठक में सामने आई नेताओं की नोकझोंक ने मामले को और तूल दे दिया है। इस घटना को एसआईआर को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं, पूरे घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी प्रक्रिया को लेकर किसी पक्ष की सहमति नहीं है तो अपनी बात को उचित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में कानून को हाथ में लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने के लिए उचित माध्यम मौजूद हैं और किसी भी विवाद को कानून के दायरे में रहकर ही उठाया जाना चाहिए।

रुद्रपुर की बैठक में हुए विवाद के बाद एसआईआर अभियान को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दल और प्रशासन इस मामले को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद किस दिशा में जाता है।