स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट


हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में भस्म आरती के बाद ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं को भीतर तक प्रभावित कर दिया। पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज पीड़ा में होने के बावजूद लगातार महादेव का स्मरण करते नजर आए।


बताया गया कि शारीरिक पीड़ा के बीच भी स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के मुख से बार-बार “महादेव… महादेव…” का उच्चारण होता रहा। उनकी इस अवस्था को देखकर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे और वातावरण भक्तिमय हो गया।


भस्म आरती के बाद मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं की नजरें स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज पर टिकी रहीं। पीड़ा के बावजूद उनके द्वारा लगातार भगवान शिव का नाम जपने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक करने वाला रहा।


श्रद्धालुओं का कहना था कि महाराज की साधना और शिव के प्रति अटूट आस्था इस दृश्य में साफ दिखाई दे रही थी। कई श्रद्धालुओं ने इसे शिवभक्ति और समर्पण का अद्भुत उदाहरण बताया।

मंदिर परिसर में मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा भी होती रही कि स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज की साधना में शिव तत्व की अनुभूति होती है। श्रद्धालुओं ने इसे भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी गहरी आस्था और समर्पण से जोड़कर देखा।


शारीरिक पीड़ा के बावजूद उनके चेहरे पर साधना का तेज और भगवान शिव के प्रति समर्पण का भाव दिखाई दे रहा था। उनके मुख से लगातार निकल रहा महादेव का नाम वहां मौजूद लोगों के लिए आध्यात्मिक अनुभूति जैसा रहा।




इस भावुक दृश्य के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। किसी ने इसे अटूट तपस्या बताया तो किसी ने शिवभक्ति की पराकाष्ठा करार दिया। वहीं कुछ श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक बताया।
दक्षिण काली मंदिर का पूरा परिसर कुछ समय के लिए भक्तिभाव और आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर नजर आया। श्रद्धालु शांत भाव से इस दृश्य को देखते रहे और कई लोगों ने भगवान शिव का स्मरण भी किया।

भस्म आरती के बाद सामने आए इस दृश्य ने श्रद्धालुओं के मन में गहरी छाप छोड़ी। पीड़ा के बीच भी महादेव का नाम लेते स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज की तस्वीर श्रद्धालुओं के लिए आस्था, साधना और शिवभक्ति के भाव को और गहरा कर गई।

