स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट


मसूरी गोलीकांड की बरसी पर 2 सितंबर को होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के लिए उप जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित बैठक में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रित नहीं किए जाने पर आक्रोश बढ़ गया है। मामले को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने शहीद स्थल झूलाघर पर बैठक कर अपनी नाराजगी जताई।


उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की बैठक में आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को ही शहीदों की बरसी से जुड़े कार्यक्रम की तैयारियों से दूर रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे आंदोलनकारियों का अपमान बताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की।


बैठक के दौरान राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई, जिन पर राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया गया है।


मंच के अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने कहा कि 22 अगस्त को उप जिलाधिकारी कार्यालय में बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन इसमें राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड के निर्माण के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। ऐसे में मसूरी गोलीकांड की बरसी जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम की तैयारियों में उनसे विचार-विमर्श नहीं किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी इस मामले को लेकर चुप नहीं बैठेंगे।


राज्य आंदोलनकारी अनिल गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड निर्माण आंदोलन में कई लोगों ने अपने परिजनों को खोया और अनेक आंदोलनकारी पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए। उन्होंने कहा कि आज उन्हीं लोगों की उपेक्षा किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।




राज्य आंदोलनकारी देवी गोदियाल ने कहा कि हर वर्ष 2 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रित किया जाता रहा है। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने में भी उनकी सहभागिता रहती थी, लेकिन इस बार उन्हें बैठक से दूर रखा गया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि मसूरी गोलीकांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है और इससे जुड़े कार्यक्रमों में आंदोलनकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने की मांग की।

राज्य आंदोलनकारी मंच ने मुख्यमंत्री से मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। मंच ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलनकारियों की उपेक्षा जारी रही और उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे।

