स्थान : नैनीताल
ब्यूरो रिपोर्ट


जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष से परेशान ग्रामीणों के लिए राहत की खबर है। वन्यजीवों को आबादी और खेती वाले क्षेत्रों में आने से रोकने के लिए जिले के 109 गांवों में फेंसिंग और सोलर लाइट लगाने की योजना पर काम शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही चैनलिंग के माध्यम से भी वन्यजीवों की आवाजाही को नियंत्रित करने की तैयारी है।


मानव-वन्यजीव संघर्ष की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील गांवों को चिन्हित किया है। इन गांवों में प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को वन्यजीवों के हमले से बचाने के साथ ही खेतों में फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना भी है।


जिलाधिकारी नैनीताल ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए वन विभाग, कृषि विभाग और उद्यान विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई थी। टीम ने पिछले दस वर्षों में हुई घटनाओं का अध्ययन कर संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया है। इसी आधार पर कई गांवों को रेड जोन में शामिल किया गया है।


प्रशासन के अनुसार रेड जोन में शामिल 109 गांवों में पहले चरण में सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। यहां फेंसिंग लगाने के साथ सोलर लाइट की व्यवस्था की जाएगी, जिससे रात के समय वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनके गांवों की ओर आने की संभावना को कम करने में मदद मिल सके।

इसके अलावा चैनलिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके जरिए वन्यजीवों की आवाजाही को आबादी और कृषि क्षेत्रों से दूर रखने का प्रयास होगा। प्रशासन का मानना है कि अलग-अलग उपायों को एक साथ लागू करने से मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक चिंता महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बनी हुई है। जंगल और आसपास के क्षेत्रों में घास काटने के दौरान महिलाओं के वन्यजीवों से सामना होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में फेंसिंग और अन्य सुरक्षा उपाय ग्रामीण महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।



खेती-बाड़ी करने वाले ग्रामीण भी वन्यजीवों की आवाजाही से परेशान हैं। खेतों में काम करने के दौरान वन्यजीवों के अचानक सामने आने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा जंगली जानवरों के खेतों में पहुंचने से फसलों को नुकसान भी होता है, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पहले चरण में 109 चिन्हित गांवों में काम पूरा करने पर जोर दिया जाएगा। इसके बाद मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित अन्य गांवों को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में घटनाओं और संवेदनशीलता के आधार पर गांवों की प्राथमिकता तय की जाएगी।

प्रशासन और विभागों की संयुक्त पहल से ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले समय में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी। फेंसिंग, सोलर लाइट और चैनलिंग जैसे उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों को भी सुरक्षित क्षेत्र उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

