मुल्तान जोत महोत्सव में दूध की होली से रंगीन हुआ हर की पौड़ी

मुल्तान जोत महोत्सव में दूध की होली से रंगीन हुआ हर की पौड़ी

स्थान :हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

हरिद्वार के गंगा घाटों, खासकर हर की पौड़ी पर सोमवार को अनोखा और रंगीन नजारा देखने को मिला। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे मुल्तान समाज के लोगों ने हर की पौड़ी को मुल्तानी रंग में रंग दिया। श्रद्धालुओं के बीच आयोजित मुल्तान जोत महोत्सव में लोगों ने मां गंगा के साथ दूध की होली खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

हर की पौड़ी के पवित्र ब्रह्मकुंड में दूध अर्पित करने और दूध की होली खेलने की परंपरा को मुल्तान समाज के लोग आस्था और श्रद्धा से निभाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग गंगा तट पर एकत्र हुए और मां गंगा से देश, समाज और विश्व की खुशहाली की कामना की।

मुल्तान जोत महोत्सव की परंपरा करीब एक सदी से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। मान्यता के अनुसार वर्ष 1911 में पाकिस्तान के मुल्तान निवासी व्यापारी लाला रूपचंद पैदल यात्रा कर हरिद्वार पहुंचे थे। उन्होंने मां गंगा में ज्योत प्रवाहित कर अपने परिवार की खुशहाली और संकट दूर होने की कामना की थी।

बताया जाता है कि लाला रूपचंद की दस संतानें थीं, लेकिन दुर्भाग्य से उनकी कोई संतान जीवित नहीं बची। इसी बीच उनकी एक बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई। बेटी की हालत देखकर लाला रूपचंद को उसके भी नहीं बचने की आशंका सताने लगी।

इसी दौरान किसी व्यक्ति ने उन्हें सलाह दी कि यदि वह मुल्तान से पैदल हरिद्वार जाएं और मां गंगा में ज्योत प्रवाहित करें तो गंगा मैया के आशीर्वाद से उनके दुख दूर हो सकते हैं। इसके बाद लाला रूपचंद मुल्तान से ज्योत लेकर पैदल हरिद्वार पहुंचे और मां गंगा में ज्योत प्रवाहित की। समाज की मान्यता है कि इसके बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई।

लाला रूपचंद द्वारा शुरू की गई यह यात्रा समय के साथ परंपरा में बदल गई। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाला मुल्तान समाज इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में हरिद्वार में इस वर्ष 116वां मुल्तान जोत महोत्सव मनाया जा रहा है।

महोत्सव के दौरान मां गंगा को दूध अर्पित करने और गंगा के साथ दूध की होली खेलने का विशेष महत्व माना जाता है। समाज के लोगों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गंगा की पवित्रता और निर्मलता बनाए रखने का संदेश भी दिया जाता है।

मुल्तान समाज के लोगों ने मां गंगा से देश और दुनिया में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। साथ ही गंगा की स्वच्छता, निर्मलता और संरक्षण का संकल्प भी दोहराया। आयोजन के माध्यम से समाज में आपसी भाईचारा और मेल-जोल बढ़ाने का संदेश दिया गया।

हर की पौड़ी पर दूध की होली और मुल्तानी रंगों से सजा गंगा तट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने इस आयोजन में भाग लिया और मां गंगा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। आयोजकों ने कहा कि इस परंपरा का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों तक गंगा के प्रति श्रद्धा, स्वच्छता और सामाजिक एकता का संदेश पहुंचाना है।