उत्तराखंड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल अब दूसरे राज्यों में भी बना पहचान

उत्तराखंड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल अब दूसरे राज्यों में भी बना पहचान

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के भूस्खलन प्रबंधन और भू-तकनीकी विशेषज्ञता का मॉडल अब दूसरे राज्यों में भी अपनी पहचान बना रहा है। उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (यूएलएमएमसी) को पहली बार अपनी तकनीकी सेवाओं के जरिए राजस्व प्राप्त हुआ है। केंद्र ने तकनीकी सेवाएं देकर 4.21 लाख रुपये की आय अर्जित की है।

सहारनपुर में प्रस्तावित खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए यूएलएमएमसी ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। परियोजना में भूस्खलन रोकथाम से जुड़े कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम ने यूएलएमएमसी की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ लिया।

परियोजना के तहत यूएलएमएमसी को केवल डीपीआर तैयार करने तक सीमित जिम्मेदारी नहीं दी गई थी, बल्कि तकनीकी पर्यवेक्षण का दायित्व भी सौंपा गया था। इस दौरान केंद्र के विशेषज्ञों ने परियोजना क्षेत्र की भौगोलिक और भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों का अध्ययन करते हुए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए।

जनवरी 2025 में यूएलएमएमसी की विशेषज्ञ टीम ने खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में भूस्खलन की संभावनाओं, भू-संरचना और निर्माण कार्यों से जुड़े तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया गया।

विशेषज्ञ टीम के निरीक्षण और तकनीकी अध्ययन के आधार पर भूस्खलन रोकथाम के लिए जरूरी उपाय सुझाए गए। यूएलएमएमसी की तकनीकी संस्तुतियों के आधार पर किए जा रहे निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।

यूएलएमएमसी की स्थापना के बाद यह पहली बार है जब केंद्र ने अपनी विशेषज्ञ तकनीकी सेवाओं के जरिए राजस्व अर्जित किया है। इसे केंद्र की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इससे उत्तराखंड की भूस्खलन प्रबंधन विशेषज्ञता को राज्य से बाहर भी उपयोग किए जाने का रास्ता मजबूत हुआ है।

केंद्र की ओर से अब तक विभिन्न विभागों और संस्थाओं के लिए आठ से अधिक महत्वपूर्ण डीपीआर तैयार की जा चुकी हैं। इन परियोजनाओं में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के तकनीकी अध्ययन और रोकथाम से जुड़े कार्य शामिल हैं।

यूएलएमएमसी वर्तमान में डीपीआर तैयार करने के साथ-साथ तकनीकी निरीक्षण, भू-वैज्ञानिक अध्ययन और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के आकलन जैसी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। केंद्र की विशेषज्ञता का उपयोग आपदा जोखिम को कम करने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण की योजना तैयार करने में किया जा रहा है।

खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराकर यूएलएमएमसी ने यह साबित किया है कि उत्तराखंड में विकसित भूस्खलन प्रबंधन की विशेषज्ञता दूसरे राज्यों की परियोजनाओं के लिए भी उपयोगी है। 4.21 लाख रुपये की पहली तकनीकी आय के साथ केंद्र अब विशेषज्ञ सेवाओं के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर भी कदम बढ़ा रहा है।