स्थान : जसपुर
ब्यूरो रिपोर्ट


जसपुर क्षेत्र में बरसात के मौसम के बीच वायरल बीमारी के बढ़ते प्रकोप को लेकर चिंता बढ़ गई है। लगातार दो युवकों की मौत के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी मामले को लेकर जसपुर के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ और पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने अपने नर्सिंग होम में पत्रकार वार्ता आयोजित की।


पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. सिंघल ने बरसात के मौसम में फैल रहे वायरल संक्रमण और मरीजों में दिखाई दे रहे कोविड जैसे लक्षणों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है और लक्षण दिखाई देने पर मरीजों को समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।


डॉ. सिंघल ने बताया कि कुछ मरीजों में ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जो कोविड संक्रमण के दौरान देखे गए लक्षणों से मिलते-जुलते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी नए कोविड जैसे वायरस की पुष्टि नहीं हुई है और केवल लक्षणों के आधार पर किसी संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।


उन्होंने कहा कि वायरल संक्रमण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए मरीजों की उचित जांच जरूरी है। इस संबंध में उन्होंने उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री और कुमाऊं मंडल के चिकित्सा निदेशक से भी वार्ता करने की बात कही है।

डॉ. सिंघल ने मरीजों की जांच के लिए कोविड जांच किट मंगाने की बात भी कही। उनका कहना है कि जांच के बाद ही मरीजों में दिखाई दे रहे लक्षणों के वास्तविक कारण का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वायरल बीमारी के लक्षणों को हल्के में न लें। बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी या अन्य लक्षण दिखाई देने पर समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार कराएं।



पूर्व विधायक ने कहा कि बरसात के मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए लोगों को अपनी सेहत के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी।
उन्होंने लोगों को खान-पान सही रखने की भी सलाह दी। डॉ. सिंघल ने कहा कि संतुलित और पौष्टिक भोजन के साथ पर्याप्त सावधानी बरतकर संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। उन्होंने बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयां लेने से भी बचने की अपील की।

डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने कहा कि फिलहाल किसी नए कोविड जैसे वायरस की पुष्टि से साफ तौर पर इनकार नहीं किया जा सकता और न ही इसकी पुष्टि की जा सकती है। ऐसे में घबराने के बजाय सावधानी बरतना और लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच एवं उपचार कराना ही सबसे उचित कदम है।

