राजकीय शिक्षक संघ ने विधायक सुमित हृदयेश को सौंपा ज्ञापन, एलटी शिक्षकों से टीईटी की बाध्यता हटाने की मांग

राजकीय शिक्षक संघ ने विधायक सुमित हृदयेश को सौंपा ज्ञापन, एलटी शिक्षकों से टीईटी की बाध्यता हटाने की मांग

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

हल्द्वानी में राजकीय शिक्षक संघ, उत्तराखंड शाखा जनपद नैनीताल के पदाधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल ने विधायक सुमित हृदयेश से उनके आवास पर मुलाकात कर शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से पूर्व से कार्यरत एलटी शिक्षकों के लिए टीईटी की बाध्यता समाप्त करने की मांग उठाई।

शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने विधायक को बताया कि प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत एलटी यानी सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां निर्धारित सेवा नियमावली के तहत आवश्यक शैक्षिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं के आधार पर चयन प्रक्रिया के माध्यम से हुई हैं। इनमें से कई शिक्षक लंबे समय से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

संघ ने कहा कि पूर्व में नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों पर नई टीईटी बाध्यता लागू होने से उनकी सेवा संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे शिक्षकों की सेवा, पदोन्नति, सेवा सुरक्षा और भविष्य की अन्य संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

इस मामले पर विधायक सुमित हृदयेश ने टीईटी की बाध्यता का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे शिक्षकों के प्रति बेहद तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों ने निर्धारित नियमों के तहत नियुक्त होकर अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष शिक्षा व्यवस्था को समर्पित किए हैं, उनसे सेवा के इस पड़ाव पर दोबारा परीक्षा देने की अपेक्षा करना उचित नहीं है।

विधायक ने कहा कि आज कई शिक्षक 50 से 55 वर्ष की आयु तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में उनसे दोबारा परीक्षा देने की अपेक्षा करना उनके लिए अन्यायपूर्ण और बेहद कठिन स्थिति पैदा करने वाला निर्णय है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक विद्यालयों में सेवाएं देकर हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का काम किया है, उनकी योग्यता और अनुभव पर इस तरह सवाल उठाना उचित नहीं है।

सुमित हृदयेश ने कहा कि 55 वर्ष की उम्र में किसी शिक्षक को दोबारा परीक्षा की बाध्यता में डालना व्यावहारिक रूप से भी कठिन है। उन्होंने कहा कि शिक्षक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं, इसलिए सरकार को उनकी सेवा-सुरक्षा, सम्मान और भविष्य को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील एवं न्यायसंगत निर्णय लेना चाहिए।

विधायक ने कहा कि वर्षों से विधिवत नियुक्त होकर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को अचानक नई बाध्यता के दायरे में लाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूर्व से कार्यरत एलटी शिक्षकों के मामले में मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें टीईटी की बाध्यता से उचित छूट और संरक्षण दिया जाए।

उन्होंने शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इस मांग को आगामी विधानसभा सत्र में पूरी मजबूती के साथ उठाया जाएगा। सुमित हृदयेश ने कहा कि शिक्षकों के हित, सम्मान और सेवा-सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर वे पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ने पर शासन स्तर पर भी प्रभावी पैरवी करेंगे।

ज्ञापन सौंपने के दौरान राजकीय शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष मदन गोस्वामी के नेतृत्व में मंडलीय उपाध्यक्ष प्रीति मजगाई, पूर्व मंडलीय अध्यक्ष डॉ. गोकुल मर्तोलिया, पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. विवेक पाण्डेय, पूर्व जिला उपाध्यक्ष हेम त्रिपाठी, पूर्व जिला अध्यक्ष चंपावत पान सिंह मेहता, एनएमओपीएस नैनीताल अध्यक्ष मीनाक्षी कीर्ति, पूर्व जिला संयुक्त मंत्री रश्मि पांडे, हल्द्वानी ब्लॉक मंत्री गणेश जोशी, धीरेन्द्र मिश्रा, पूर्व संयुक्त मंत्री त्रिलोक ब्रजवासी, कुलदीप जोशी, जगदीश कुमार विमल, बलवंत हयांकी और कृष्ण सोनाल सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।