स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट


चंपावत जिले के सबसे बड़े लोहाघाट महाविद्यालय की विभिन्न समस्याओं को लेकर एबीवीपी और एनएसयूआई आमने-सामने आ गए हैं। दोनों छात्र संगठनों ने महाविद्यालय परिसर में अलग-अलग स्थानों पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। एक साथ दो छात्र संगठनों के आंदोलन शुरू होने से महाविद्यालय में माहौल गरमा गया है।


एनएसयूआई ने कॉलेज अध्यक्ष आयुष गोस्वामी के नेतृत्व में महाविद्यालय के मुख्य गेट पर धरना शुरू किया है। वहीं, एबीवीपी ने पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष ऋतिक ढेक के नेतृत्व में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के पास तंबू लगाकर आंदोलन शुरू कर दिया। दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं के आमने-सामने होने की स्थिति को देखते हुए पुलिस भी मौके पर पहुंची।



शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाध्यक्ष अशोक कुमार पुलिस बल के साथ लोहाघाट महाविद्यालय पहुंचे। पुलिस ने दोनों छात्र संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर स्थिति पर नजर बनाए रखी। फिलहाल दोनों संगठन अपने-अपने स्थान पर धरने पर डटे हुए हैं।

एनएसयूआई कॉलेज अध्यक्ष आयुष गोस्वामी ने आरोप लगाया कि उनका आंदोलन पहले से प्रस्तावित था, लेकिन एनएसयूआई के धरने की जानकारी होने के बाद एबीवीपी ने भी अपना आंदोलन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 10 वर्षों से छात्रसंघ में एबीवीपी का कब्जा रहा है, इसके बावजूद महाविद्यालय की मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

एनएसयूआई ने महाविद्यालय की प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने, लाइब्रेरियन की नियुक्ति और छात्र-छात्राओं के लिए बस सुविधा शुरू करने की मांग की है। आयुष गोस्वामी ने कहा कि जिले के सबसे बड़े महाविद्यालय में इतिहास सहित कई विषयों में एमए की पढ़ाई की सुविधा नहीं है। इसके अलावा शिक्षकों की भी भारी कमी बनी हुई है, जिससे विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

आयुष गोस्वामी ने चेतावनी दी कि यदि छात्र-छात्राओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो एनएसयूआई का आंदोलन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने एबीवीपी पर छात्र-छात्राओं को गुमराह करने का आरोप भी लगाया। दोनों छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण महाविद्यालय का माहौल भी चर्चा में बना हुआ है।



वहीं, धरने पर बैठे एबीवीपी नेताओं ने एनएसयूआई पर पलटवार करते हुए कहा कि एनएसयूआई केवल बरसाती मेंढक की तरह सामने आती है और उसे छात्र-छात्राओं तथा महाविद्यालय की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। एबीवीपी नेताओं ने कहा कि संगठन ने पिछले वर्ष भी महाविद्यालय की समस्याओं को लेकर दिन-रात आंदोलन किया था, जिसके बाद कई समस्याओं का समाधान हुआ।

एबीवीपी नेताओं ने कहा कि छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर संगठन आज भी गंभीर है। विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार विद्यार्थियों की गलत मार्कशीट ठीक कराने, महाविद्यालय की प्रयोगशालाओं में बेहतर उपकरण उपलब्ध कराने समेत अन्य समस्याओं के समाधान की मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।

फिलहाल दोनों छात्र संगठन एक-दूसरे पर आंदोलन को लेकर आरोप लगा रहे हैं और अपने-अपने धरने पर डटे हुए हैं। एक ही समय पर दो छात्र संगठनों के अनिश्चितकालीन आंदोलन से महाविद्यालय में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। अब देखना होगा कि महाविद्यालय प्रशासन और विश्वविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

