नाग पंचमी पर नागदेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

नाग पंचमी पर नागदेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

स्थान : पौड़ी
ब्यूरो रिपोर्ट

नाग पंचमी के पावन अवसर पर पौड़ी के प्रसिद्ध नागदेव मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। तीन दिवसीय विशेष पूजा-अर्चना के समापन के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें आसपास के क्षेत्रों के साथ ही दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने नागदेवता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया।

नाग पंचमी को लेकर मंदिर में तीन दिन पहले से ही विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। नाग पंचमी के दिन विधि-विधान से नागदेवता की पूजा के बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और दिनभर मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बनी रही।

नागदेव मंदिर को लेकर क्षेत्र में एक प्राचीन धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है। बताया जाता है कि डोभ श्रीकोट क्षेत्र में कई वर्ष पूर्व एक परिवार के घर नाग के रूप में एक बच्चे ने जन्म लिया था। मान्यता के अनुसार बच्चे ने अपने माता-पिता से अपने लिए एक स्थान चुनने और वहां मंदिर स्थापित करने की इच्छा जताई थी।

इसके बाद परिवार उस बच्चे को लेकर नागदीप नागदेव के जंगल की ओर गया। बताया जाता है कि जंगल में पहुंचने के बाद बच्चा अचानक अदृश्य हो गया। इसके बाद इसी स्थान को पवित्र मानते हुए यहां नागदेव मंदिर की स्थापना की गई। तभी से मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

मंदिर के पंडित हरीश चंद्र गैरोला ने बताया कि सावन माह के बाद नाग पंचमी का यहां विशेष महत्व माना जाता है। नाग पंचमी के दिन नागदेवता की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

उन्होंने बताया कि नाग पंचमी के अवसर पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और पूजा के बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। भंडारे में हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं।

मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि नाग पंचमी से तीन दिन पहले से ही मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम और पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। नाग पंचमी के दिन विशेष पूजा के बाद भंडारा आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष मंदिर में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और मंदिर के प्रति लोगों की आस्था लगातार बनी हुई है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के चलते नाग पंचमी पर सर्प दोष से संबंधित पूजा-अर्चना कराने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचते हैं। श्रद्धालु नागदेवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा।

नाग पंचमी के अवसर पर इस बार भी मंदिर में दिनभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं। आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने नागदेवता के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। विशाल भंडारे के साथ तीन दिवसीय विशेष पूजा-अर्चना का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने मंदिर की प्राचीन मान्यता और धार्मिक महत्व के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।