स्कूलों की NOC से पहले फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी, बाल संरक्षण आयोग ने दिए सख्त निर्देश

स्कूलों की NOC से पहले फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी, बाल संरक्षण आयोग ने दिए सख्त निर्देश

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) द्वारा किसी स्कूल को एनओसी जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित विद्यालय में फायर सेफ्टी ऑडिट कराया गया है या नहीं और सभी अग्निशमन उपकरण सही स्थिति में काम कर रहे हैं।

डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बदलते मौसम और तापमान को देखते हुए स्कूल परिसरों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता और संबंधित विभागों को इस दिशा में गंभीरता से काम करना होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदेश के प्रत्येक शहर में चीफ फायर ऑफिसर (CFO) के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया जाए। इस अभियान के तहत स्कूलों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों, कोचिंग संस्थानों और इनडोर खेल केंद्रों का भी फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाना चाहिए।

आयोग अध्यक्ष ने कहा कि जांच के दौरान यदि कोई संस्थान निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित नहीं पाया जाता है तो इसकी लिखित सूचना संबंधित शिक्षा विभाग को दी जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा मानक पूरे होने तक ऐसे विद्यालयों के संचालन पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

डॉ. खन्ना ने आग लगने की घटनाओं के प्रमुख कारणों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शॉर्ट सर्किट के अलावा स्कूलों में मिड-डे मील की रसोई और टक शॉप्स में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर भी आग की घटनाओं का बड़ा कारण बन सकते हैं।

उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूलों की रसोई और गैस सिलेंडर वाले स्थानों पर फायर रिटार्डेंट ब्लैंकेट और रेत से भरी बाल्टियां अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। इसके साथ ही अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच और उनके सही स्थिति में होने का सत्यापन भी किया जाना चाहिए।

बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि केवल सुरक्षा उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों को उनके इस्तेमाल की जानकारी भी होनी चाहिए। आपात स्थिति से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल और सुरक्षा प्रशिक्षण कराया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फायर विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD), शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को मिशन मोड में काम करना होगा। सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही सुरक्षा मानकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

डॉ. गीता खन्ना ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों से स्कूलों और अन्य बाल संस्थानों का नियमित निरीक्षण कराने तथा कमियों को समय रहते दूर करने की अपील की, ताकि किसी भी संभावित अग्निकांड को पहले ही रोका जा सके।