स्थान : पौड़ी
ब्यूरो रिपोर्ट


जनपद पौड़ी की ल्वाली घाटी में साधना स्वायत्त सहकारिता समिति द्वारा नवनिर्मित कलेक्शन सेंटर एवं कार्यालय का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी मुख्य अतिथि और ब्लॉक प्रमुख पौड़ी अस्मिता नेगी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।


लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। कलेक्शन सेंटर खुलने से क्षेत्र में उत्पादित पहाड़ी और जैविक उत्पादों को एक स्थान पर एकत्र कर बाजार तक पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध होगी।



पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का संकल्प गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। इसी उद्देश्य को लेकर सरकार की ओर से लगातार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से काम किया जा रहा है।


विधायक ने कहा कि ल्वाली में कलेक्शन सेंटर खुलने से आसपास के ग्रामीणों को अपने खेतों में उत्पादित ऑर्गेनिक और पहाड़ी उत्पाद बेचने के लिए दूर बाजारों की तलाश नहीं करनी पड़ेगी। किसान और महिलाएं अपने अतिरिक्त उत्पादन को आसानी से सेंटर तक पहुंचा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के अवसर भी बढ़ेंगे।


ब्लॉक प्रमुख पौड़ी अस्मिता नेगी ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। ल्वाली में शुरू हुआ कलेक्शन सेंटर इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



अस्मिता नेगी ने कहा कि सेंटर के माध्यम से महिलाएं मांडवा, झंगोरा सहित अन्य पहाड़ी उत्पादों को बाजार तक पहुंचाकर अच्छी आमदनी कमा सकती हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
सहकारिता समिति से जुड़ी महिला सुशील रावत ने कहा कि कलेक्शन सेंटर खुलने से आसपास की महिलाओं को अपने खेतों में उत्पादित दाल, झंगोरा, मांडवा और अन्य पहाड़ी उत्पाद आसानी से बेचने की सुविधा मिलेगी। इससे उन्हें उत्पादों के लिए बाजार तलाशने की परेशानी से राहत मिलेगी।

स्थानीय महिलाओं ने कलेक्शन सेंटर को ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बेहतर पहल बताया। उनका कहना है कि यदि स्थानीय उत्पादों को उचित बाजार और बेहतर मूल्य मिलता है तो इससे गांव की महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ पहाड़ी कृषि एवं पारंपरिक उत्पादों को भी नई पहचान मिल सकेगी।

