

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के गौलापार में स्थानांतरित किए जाने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को गौलापार में पहले से चयनित 26 हेक्टेयर भूमि तत्काल हाईकोर्ट को सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने छह सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक प्रशासनिक और वैधानिक मंजूरियां पूरी करने का आदेश भी दिया है।


सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के नए परिसर के निर्माण की प्रक्रिया में अब किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को समयबद्ध तरीके से सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।


सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने देहरादून बार एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया। वहीं, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए गौलापार में चयनित भूमि का कब्जा हाईकोर्ट को सौंपने का आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि में नैनीताल हाईकोर्ट का पूर्व आदेश भी अहम रहा। 9 मई 2024 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऋतु बाहरी ने ऋषिकेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने संबंधी आदेश दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट की शिफ्टिंग को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय तक बहस और प्रक्रिया चलती रही।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने इस विवाद पर विराम लगा दिया है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट का नया परिसर ऋषिकेश में नहीं, बल्कि हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इससे लंबे समय से लंबित परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है।

गौलापार में आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईकोर्ट परिसर बनने से न्यायिक व्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ कुमाऊं क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। सरकार को अब निर्माण कार्य और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर होंगी कि वह तय समय सीमा के भीतर भूमि हस्तांतरण और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को किस गति से आगे बढ़ाती है।

