

स्थान : डोईवाला (देहरादून)
ब्यूरो रिपोर्ट

ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित “सात मोड़” क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर निर्माण के लिए 3000 से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों में रोष देखने को मिला। रविवार को बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हुए और पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने की अपील की।


प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि हजारों पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होगा और इसका दीर्घकालिक असर पर्यावरण पर पड़ेगा।



पर्यावरण प्रेमियों ने आशंका जताई कि बड़ी संख्या में पेड़ों के हटने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि जंगलों का लगातार कम होना भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।


विरोध में शामिल लोगों ने पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल पेड़ों को बचाने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण बचाने का प्रयास है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना है कि परियोजना के क्रियान्वयन से पहले ऐसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, जिनसे पेड़ों की कटाई को न्यूनतम किया जा सके।


पर्यावरण प्रेमियों ने सरकार और संबंधित विभागों से परियोजना की दोबारा समीक्षा करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो सड़क और फ्लाईओवर के निर्माण की ऐसी वैकल्पिक योजना तैयार की जाए, जिससे अधिक से अधिक पेड़ों को संरक्षित रखा जा सके।



स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास के पक्षधर हैं। उन्होंने सरकार से विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाते हुए निर्णय लेने तथा क्षेत्र की हरित संपदा को सुरक्षित रखने की अपील की।

