मंदिरों की गरिमा हर हाल में बनी रहनी चाहिए, चढ़ावा विवाद की निष्पक्ष जांच हो: स्वामी चिदानंद सरस्वती

मंदिरों की गरिमा हर हाल में बनी रहनी चाहिए, चढ़ावा विवाद की निष्पक्ष जांच हो: स्वामी चिदानंद सरस्वती

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश की आस्था और श्रद्धा से जुड़े पवित्र धार्मिक स्थलों की गरिमा किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी वित्तीय अनियमितता या चढ़ावे के दुरुपयोग की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालु भगवान के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा के साथ मंदिरों में चढ़ावा अर्पित करते हैं। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उनकी आस्था, विश्वास और भावनाओं का प्रतीक है। ऐसे में इस पवित्र विश्वास की रक्षा करना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उन्हें गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए मंदिरों के प्रशासन और प्रबंधन में पारदर्शी व्यवस्था होना समय की आवश्यकता है। इससे श्रद्धालुओं का भरोसा और अधिक मजबूत होगा तथा धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।

उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं से अपील की कि मामले की जांच बिना किसी पूर्वाग्रह के कराई जाए। यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि धार्मिक आस्था समाज को जोड़ने का कार्य करती है। इसलिए आस्था से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, ईमानदारी और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा देश के पवित्र धार्मिक स्थलों की गरिमा और प्रतिष्ठा अक्षुण्ण बनी रहेगी।