

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए देशभर में शोक का माहौल है लगभग चार महीने पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों में उनकी मौत के बाद अब 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है तेहरान की सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग अपने नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं।


तेहरान के ग्रैंड मोसाला में खामेनेई का पार्थिव शरीर कांच के विशेष ताबूत में रखा गया है, जहां आम नागरिकों को अंतिम दर्शन कराए जा रहे हैं उनके साथ हमले में मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत भी श्रद्धांजलि के लिए रखे गए हैं। शोक में डूबे लोग मातम मना रहे हैं और देशभर से आए श्रद्धालु उन्हें अंतिम विदाई दे रहे हैं।


ईरान सरकार ने अंतिम संस्कार को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं राजधानी तेहरान में कई मार्ग बंद किए गए हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है अधिकारियों का कहना है कि लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए समारोह को कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है।


अंतिम यात्रा केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगी पार्थिव शरीर को ईरान के पवित्र शहर कोम ले जाया जाएगा, जिसके बाद इराक के प्रमुख शिया धार्मिक केंद्र नजफ और कर्बला में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होंगे यह यात्रा शिया समुदाय के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तय की गई है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में 9 जुलाई को खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में दफनाया जाएगा मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह के निकट उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसे ईरान का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है सरकार का कहना है कि यह समारोह देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक होगा।
इस बीच ईरान की नई सत्ता व्यवस्था भी चर्चा में है खामेनेई के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति की गई है, हालांकि सुरक्षा कारणों से वे अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं इससे देश की राजनीतिक स्थिति और भविष्य को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं जारी हैं।

खामेनेई की अंतिम विदाई केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की राजनीति, राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय तनाव के बीच शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखी जा रही है लाखों लोगों की मौजूदगी, कड़े सुरक्षा इंतजाम और कई दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम इस बात का संकेत हैं कि ईरान इस समारोह को अपने इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं में शामिल करना चाहता है।



