

स्थान : केदारनाथ
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचा है। एक साधारण परिवार से निकलकर संगठनात्मक राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले धामी आज प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। समर्थक उनकी कार्यशैली को युवा नेतृत्व, अनुशासन और जनसरोकारों से जोड़कर देखते हैं।


पिथौरागढ़ जिले के एक सैनिक परिवार में जन्मे पुष्कर सिंह धामी ने बचपन से ही अनुशासन और सेवा की भावना का वातावरण देखा। पहाड़ी जीवन की चुनौतियों के बीच पले-बढ़े धामी ने शिक्षा के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के माध्यम से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।



वर्ष 2012 में धामी पहली बार खटीमा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने लगातार संगठन और विधानसभा दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2021 में उन्हें उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया। उस समय उन्हें राज्य का सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी ने उनके नेतृत्व में सरकार बनाई और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी।


राजनीतिक जीवन के साथ-साथ उनका पारिवारिक जीवन भी चर्चा का विषय रहा है। वर्ष 2011 में उनका विवाह गीता धामी से हुआ। सार्वजनिक कार्यक्रमों में दोनों कई बार एक साथ दिखाई देते हैं। समर्थकों का मानना है कि पारिवारिक सहयोग ने धामी को सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने में मजबूती प्रदान की है।
मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम उठाना उनके प्रमुख निर्णयों में शामिल रहा। इसके अलावा नकल विरोधी कानून, अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई और विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं को आगे बढ़ाने जैसे फैसलों को भी उनकी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

हालांकि, विपक्ष ने उनके कई फैसलों और नीतियों को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठाए हैं। रोजगार, पलायन, महंगाई और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद धामी सरकार का कहना है कि वह विकास, सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है।


युवा नेतृत्व, संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक निर्णयों के कारण पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। समर्थक उन्हें राज्य के विकास और नई सोच का प्रतीक मानते हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आने वाले वर्षों में उनके नेतृत्व की सफलता का आकलन सरकार की नीतियों के दीर्घकालिक प्रभाव और जनता के विश्वास के आधार पर होगा।

