लोहाघाट में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, 0 से 5 वर्ष के बच्चों को पिलाई गई पोलियो की दवा

लोहाघाट में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, 0 से 5 वर्ष के बच्चों को पिलाई गई पोलियो की दवा

स्थान : लोहाघाट(चंपावत)
ब्यूरो रिपोर्ट

पल्स पोलियो मुक्त भारत एवं उत्तराखंड अभियान के तहत राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम का रविवार को लोहाघाट में शुभारंभ किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा ने नौनिहालों को पोलियो की दवा पिलाकर अभियान की शुरुआत की और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं।

लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम का संचालन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी के निर्देशन में किया गया। अभियान के तहत आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विभिन्न पोलियो बूथों पर पहुंचकर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई।

डॉ. विराज राठी ने बताया कि जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंपावत के निर्देशानुसार लोहाघाट विकासखंड में अधिक से अधिक बच्चों तक पोलियो की दवा पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य प्रत्येक पात्र बच्चे को पोलियो की खुराक उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि पोलियो बूथों के अलावा यात्रा कर रहे बच्चों को भी अभियान से जोड़ा गया। इसके लिए लोहाघाट के वीर कालू सिंह चौराहा और पंचेश्वर टैक्सी स्टैंड पर विशेष व्यवस्था की गई, जहां वाहनों से गुजर रहे बच्चों को भी पोलियो की दवा पिलाई गई।

चिकित्सा अधीक्षक ने जानकारी दी कि 29 और 30 जून को आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की दवा पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथों तक नहीं पहुंच पाए। इस अभियान के माध्यम से प्रत्येक बच्चे तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।

डॉ. राठी ने बताया कि लोहाघाट ब्लॉक में कुल 54 पोलियो बूथ बनाए गए हैं, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे दिन अभियान में जुटी रही। उन्होंने कहा कि पोलियो एक लाइलाज बीमारी है, लेकिन समय पर दवा पिलाकर इससे पूरी तरह बचाव किया जा सकता है।

उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने सभी जरूरी कार्य छोड़कर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं। अभियान को सफल बनाने के लिए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी स्वयं सुबह से अपनी टीम के साथ विभिन्न व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे तथा आशा कार्यकर्ताओं को अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचने के निर्देश दिए।