नीट पेपर लीक के विरोध में यूथ कांग्रेस का मशाल जुलूस, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

नीट पेपर लीक के विरोध में यूथ कांग्रेस का मशाल जुलूस, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

स्थान : रामनगर
ब्यूरो रिपोर्ट

नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच नैनीताल जिले के रामनगर के ग्रामीण क्षेत्र मालधन में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मशाल जुलूस निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की।

मशाल जुलूस के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद कई छात्रों ने मानसिक तनाव का सामना किया और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आईं। उनका कहना था कि यह स्थिति देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

इस अवसर पर यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विशाल सिंह भोजक ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक की घटनाओं से मेहनती छात्रों के सपने टूट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने में सरकार विफल रही है।

विशाल सिंह भोजक ने कहा कि देश का युवा निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली चाहता है। उनका कहना था कि यदि शिक्षा मंत्री अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असफल रहे हैं तो उन्हें नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए। साथ ही उन्होंने पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कठोर सजा देने की मांग भी की।

यूथ कांग्रेस ने चेतावनी दी कि जब तक पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन जारी रहेगा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी जारी रहेगी।