मसूरी में आवासीय नक्शों पर चल रहे होटल, प्रशासन सख्त

मसूरी में आवासीय नक्शों पर चल रहे होटल, प्रशासन सख्त

स्थान : मसूरी
ब्यरो रेपोर्ट

वर्ष 1996 में सर्वोच्च न्यायालय ने मसूरी की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए व्यावसायिक और संस्थागत निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया था। इस फैसले का उद्देश्य अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाना और भूस्खलन जैसे बढ़ते खतरों को कम करना था। न्यायालय के आदेश के तहत मसूरी के कई संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किया गया था, जहां होटल, गेस्ट हाउस और अन्य संस्थागत ढांचों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था।

इन प्रतिबंधों के अनुपालन की जिम्मेदारी मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को सौंपी गई थी। प्राधिकरण को अवैध और बिना अनुमति होने वाले निर्माण कार्यों को रोकने तथा आवश्यक होने पर सीलिंग की कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया था। इसके अलावा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी मसूरी की वहन क्षमता का अध्ययन करवाकर निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने और अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए कई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे।

इसके बावजूद मसूरी में होटल, होमस्टे और गेस्ट हाउस की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग आवासीय उपयोग के लिए भवनों के नक्शे स्वीकृत करवाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें होटल, विला या गेस्ट हाउस के रूप में संचालित करने लगते हैं। इससे न्यायालय और प्रशासनिक नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

जानकारों का कहना है कि मसूरी का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो, जहां आवासीय स्वीकृति प्राप्त भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित न की जा रही हों। इससे न केवल शहर की पर्यावरणीय क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है, बल्कि यातायात, पार्किंग और आधारभूत सुविधाओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

इस मामले में पर्यटन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग द्वारा होटल और गेस्ट हाउस संचालन के लिए लाइसेंस जारी किए जाते हैं, जिसके बाद आवासीय भवनों में भी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। परिणामस्वरूप शहर में लगातार 10 से 15 कमरों वाले नए होटल और गेस्ट हाउस विकसित हो रहे हैं।

उप जिलाधिकारी राहुल आनंद ने स्पष्ट किया है कि नियमों के विपरीत संचालित किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कई मामलों में आवासीय नक्शों की स्वीकृति लेकर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जिनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए सीलिंग के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन ऐसे मामलों की लगातार निगरानी कर रहा है।

एसडीएम राहुल आनंद ने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई जारी है। हाल ही में शहर के दो क्षेत्रों में अवैध खनन पाए जाने पर करीब पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने कहा कि पार्किंग व्यवस्था के बिना संचालित हो रहे होटलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि ऐसे प्रतिष्ठानों के कारण शहर में जाम की समस्या बढ़ रही है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।