हरिद्वार में “अखिल भारतीय संत परिषद” का गठन

हरिद्वार में “अखिल भारतीय संत परिषद” का गठन

स्थान : हरिद्वार
ब्यरो रिपोर्ट

हरिद्वार में वैशाख अमावस्या के पावन अवसर पर सनातन धर्म, वेदसम्मत संत परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से “अखिल भारतीय संत परिषद” का गठन किया गया। परिषद का नेतृत्व स्वामी आनंद स्वरूप महाराज कर रहे हैं। संत समाज ने इस नए मंच को संतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष आवाज बताया है।

परिषद की स्थापना देशभर से आए संतों, धर्माचार्यों और आध्यात्मिक गुरुओं की उपस्थिति में की गई। कार्यक्रम में 11 संस्थापक सदस्यों ने औपचारिक रूप से परिषद की घोषणा करते हुए इसे धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित मंच बताया। संतों ने कहा कि परिषद किसी भी राजनीतिक दबाव या सत्ता के प्रभाव से मुक्त रहकर कार्य करेगी।

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि आज सनातन संस्कृति और पारंपरिक आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संत समाज केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज में नैतिक जागरण और सांस्कृतिक चेतना फैलाने का कार्य भी करेगा।

परिषद का मुख्य उद्देश्य संतों की गरिमा और परंपराओं की रक्षा करना बताया गया। इसके साथ ही गुरुकुल शिक्षा, संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, गौसंरक्षण और भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

संतों ने कहा कि आधुनिक समय में युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। परिषद विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करेगी।

कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने समाज में बढ़ती सांस्कृतिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए संत समाज को एकजुट होकर कार्य करना होगा। परिषद इसी उद्देश्य को लेकर देशभर में अभियान चलाएगी।

परिषद के सदस्यों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मंच समाजहित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर कार्य करेगा। संतों ने कहा कि धर्म आधारित सामाजिक जागरूकता और सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए परिषद देश के विभिन्न राज्यों में अपने संगठन का विस्तार करेगी।

धर्माचार्यों ने उम्मीद जताई कि “अखिल भारतीय संत परिषद” आने वाले समय में संत समाज की मजबूत और प्रभावी आवाज बनेगी। कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए संतों और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला।