

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सरकार


खटीमा क्षेत्र के ग्राम जंगल जोगी ढेर में भूमि विवाद को लेकर मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। यहां के 10 परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आबादी भूमि के दस्तावेजों में गलत तरीके से सिंचाई विभाग का नाम दर्ज कर दिया गया है।


ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन को वे वर्षों से अपनी पुश्तैनी आबादी की भूमि मानते आ रहे हैं, उसे अब सरकारी रिकॉर्ड में बदल दिया गया है। उनका आरोप है कि सिंचाई विभाग के कर्मचारी इस जमीन पर तारबाड़ और चहारदीवारी बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनका हक प्रभावित हो रहा है।


पीड़ित परिवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध किया तो उन्हें डराने और धमकाने की कोशिश की गई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और दहशत का माहौल बन गया है।


इस पूरे मामले की गूंज अब राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गई है। खटीमा विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा और हर संभव मदद की जाएगी।

वहीं, प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। एसडीएम खटीमा तुषार सैनी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और उत्तराखंड के राजस्व अभिलेखों की गहन जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि दोनों विभागों के दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से हुई तो सच्चाई सामने आ जाएगी और उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन का अधिकार वापस मिल सकेगा।
फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है और ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही इस लंबे विवाद का समाधान निकल सकेगा।

