रुड़की में स्वामी विवेकानंद कॉलेज पर गंभीर आरोप, आंदोलन की चेतावनी

रुड़की में स्वामी विवेकानंद कॉलेज पर गंभीर आरोप, आंदोलन की चेतावनी

स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

रुड़की के मतलबपुर स्थित स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ एजुकेशन इन दिनों विवादों में घिरता नजर आ रहा है। कॉलेज प्रबंधन पर छात्रवृत्ति घोटाले, भर्ती में भ्रष्टाचार और अनुदान नियमों में अनियमितता जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

कॉलेज का संचालन इंपीरियल एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। आरोपों को लेकर बड़ी संख्या में लोगों ने उपजिलाधिकारी रुड़की को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कॉलेज में लंबे समय से वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं चल रही हैं।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कॉलेज प्रबंधन ने छात्रवृत्ति योजनाओं में गड़बड़ी की और पात्र छात्रों को लाभ देने में पारदर्शिता नहीं बरती। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि छात्रवृत्ति राशि के वितरण में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं।

इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि कॉलेज में नियुक्तियों के नाम पर कई लोगों से करोड़ों रुपये लिए गए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में पुलिस को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

भूमि लीज मामले में भी कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार लीज डीड में बदलाव कर निजी लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। साथ ही वर्ष 2019 में लीज धनराशि में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी को भी संदेहास्पद बताया गया है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज ने विश्वविद्यालय के निर्धारित मानकों से अधिक प्रवेश दिए हैं। उनका कहना है कि नियमों के विपरीत दाखिले लेकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि कॉलेज को अनुदान सूची से हटाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

मामले को लेकर प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई न होने तक रविदास घाट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। फिलहाल कॉलेज प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले ने रुड़की में शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।