
स्थान -देहरादून

ब्यूरो रिपोट

: देहरादून स्थित ट्रांसपोर्ट कमिश्नर कार्यालय में सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर में कार्यरत टास्क फोर्स और इंटरसेप्टर दलों के कामकाज का मूल्यांकन किया गया। बैठक का उद्देश्य बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं, रेस ड्राइविंग और रॉन्ग साइड ड्राइविंग जैसी खतरनाक प्रवृत्तियों पर प्रभावी नियंत्रण की रणनीति तैयार करना रहा।


उप परिवहन आयुक्त शैलेश तिवारी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 14 टास्क फोर्स टीमें और 16 इंटरसेप्टर वाहन सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इन वाहनों में एल्कोमीटर, स्पीड रडार गन और कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जाती है और मौके पर ही चालान की कार्रवाई की जाती है।

एक अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक की अवधि में इन टीमों ने कुल 1,18,000 वाहनों के चालान किए हैं, जबकि 7,891 वाहनों को सीज किया गया। इस दौरान 22 करोड़ 50 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया, जिसे विभाग बड़ी उपलब्धि मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वाहन सीज किए जाने से लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता और भय दोनों बढ़ता है।

बैठक में खासतौर पर शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्ती बढ़ाने का निर्णय लिया गया। विभाग ने 45 नए एल्कोमीटर खरीदे हैं। निर्देश दिए गए हैं कि नशे की हालत में वाहन चलाते पाए जाने पर वाहन सीधे सीज किए जाएं और संबंधित चालक के लाइसेंस को निलंबित करने के बजाय निरस्त करने की कार्रवाई पर विचार किया जाए।


ओवरस्पीडिंग को भी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण मानते हुए सभी टीमों को रडार गन के माध्यम से सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि आने वाले समय में सड़क सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर और अधिक कड़ाई बरती जाएगी, ताकि दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।


