
स्थान : काशीपुर उधम सिंह नगर

ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के 8 सांसदों को कुल 95.90 करोड़ रुपये की सांसद निधि दी गई थी, लेकिन केवल 18% ही खर्च हुई। RTI कार्यकर्ता नदीम उद्दीन के खुलासे ने राज्य में विकास की सुस्ती को उजागर किया।

जानकारी के अनुसार, सांसदों ने कुल 232 विकास कार्य प्रस्तावित किए, लेकिन अधिकांश काम अधिकारियों की मेज पर अटके हुए हैं। 87 कार्य कागजों पर पास होने के बावजूद जमीन पर शुरू तक नहीं हुए।


सबसे निराशाजनक प्रदर्शन गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का रहा, जिनका विकास खर्च 0% दर्ज किया गया। हरिद्वार से त्रिवेंद्र सिंह रावत और अल्मोड़ा से अजय टम्टा का खर्च भी केवल 1% तक रहा।

कुछ सांसदों ने बेहतर प्रदर्शन किया: राज्यसभा में नरेश बंसल ने 47% और लोकसभा में अजय भट्ट ने 18% खर्च कर अपेक्षाकृत सुधार दिखाया।

विश्लेषकों का कहना है कि ये आंकड़े सिर्फ वित्तीय डेटा नहीं हैं, बल्कि जनता की उम्मीदों का गला घोंटना हैं। 232 प्रस्तावित कार्य अधिकारियों की मेज पर अटके रहने के कारण विकास की वास्तविक तस्वीर पहाड़ों और ग्रामीण इलाकों तक नहीं पहुँच रही।


सवाल उठता है कि क्या अधिकारियों की सुस्ती है या सांसद स्वयं विकास के प्रति गंभीर नहीं हैं। जब तक ये 95 करोड़ रुपये फाइलों से निकलकर सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुँचेंगे, ‘देवभूमि’ का विकास सिर्फ चुनावी जुमला ही रहेगा।
विशेषज्ञों और जनता का कहना है कि शासन को जवाब देना होगा और सांसदों को अपनी सुस्ती छोड़नी होगी, वरना आने वाले समय में जनता अपने वोट के हिसाब से इन आंकड़ों की सजा दे सकती है

