

स्थान : पौड़ी
रिपोर्ट : जय ममगाई


उत्तराखंड के परंपरागत पर्यावरण पर्व “हरेला” को इस बार पौड़ी गढ़वाल जनपद में अभूतपूर्व उत्साह और व्यापक भागीदारी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के नेतृत्व में जनपद के सभी विकासखंडों में एक साथ वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत एक ही दिन में 50,000 से अधिक पौधों का रोपण किया गया।



“एक पेड़ माँ के नाम” थीम बनी विशेष आकर्षण
इस वर्ष की हरेला थीम “एक पेड़ माँ के नाम” ने जनमानस को भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य किया। हर पौधे पर माँ का नाम अंकित किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण को आत्मीयता और परिवारिक भावना से जोड़ा जा सके।


जिला मुख्यालय पर विधायकों और अधिकारियों ने किया रोपण
स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया समेत जिला स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिला न्यायालय परिसर के निकट फलदार, चारापत्ती एवं शोभायमान पौधों का रोपण कर अभियान की शुरुआत की।


सभी विभागों ने निभाई सक्रिय भागीदारी
अभियान में शिक्षा, वन, उद्यान, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, कोषागार, अर्थ एवं संख्या, पशुपालन, नगर निकाय, जलागम, कृषि विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों ने अपनी जिम्मेदारियों और क्षमताओं के अनुसार लक्षित संख्या में पौधे रोपे। प्रत्येक स्थान पर पहले से गड्ढे की खुदाई और देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। अमृत सरोवरों के किनारे भी विशेष रूप से वृक्षारोपण कराया गया।

क्या बोले जनप्रतिनिधि और अधिकारी?

विधायक राजकुमार पोरी ने कहा:
“हरेला पर्व पर पूरे जनपद ने पर्यावरण के प्रति जो प्रेम और एकजुटता दिखाई, वह सराहनीय है। एक पौधा लगाना भविष्य की सुरक्षा करना है। मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि वे लगाए गए हर पौधे की देखभाल को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानें।”

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा:

“हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार और जिम्मेदारी का पर्व है। आज जिस उत्साह और भागीदारी के साथ जनपद भर में वृक्षारोपण हुआ है, वह अनुकरणीय है। पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल ठीक उसी प्रकार करनी चाहिए जैसे हम किसी नवजात की करते हैं। हम सबको मिलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य की नींव रखनी है।”

निगरानी और रिकॉर्ड
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि प्रत्येक रोपण स्थल की जियोटैग युक्त तस्वीरें अपलोड की जा रही हैं, जिससे अभियान की प्रगति पर निगरानी रखी जा सके। उन्होंने ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों की भागीदारी को इस अभियान की सच्ची ताकत बताया।

निष्कर्ष:
हरेला पर्व इस बार केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह जनपद पौड़ी गढ़वाल में पर्यावरण संरक्षण के एक सामूहिक संकल्प के रूप में सामने आया है। “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी थीम न केवल प्रकृति से जुड़ने का भाव देती है, बल्कि समाज में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को व्यक्तिगत कर्तव्य का रूप भी देती है।



