मदरसों पर सियासत तेज, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

मदरसों पर सियासत तेज, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

रुद्रपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंच से मदरसों को लेकर सरकार के कदम पर मौलाना द्वारा जताई गई नाराजगी के बाद उत्तराखंड में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की ओर से इस मामले को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

भाजपा प्रवक्ता एवं वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मौलाना की नाराजगी पर पलटवार किया है। उन्होंने इसे उन लोगों की बौखलाहट बताया, जिनका कथित तौर पर मदरसों के नाम पर अवैध रूप से संचालन चल रहा था।

शादाब शम्स ने कहा कि मुस्लिम समाज के कुछ तथाकथित ठेकेदार लंबे समय से लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि सरकार के फैसले से ऐसे लोगों के हित प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण वे इसका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक प्राधिकरण बनाने और सभी बच्चों को समान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने का फैसला लिया है। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में समानता लाना और बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

शादाब शम्स ने आरोप लगाया कि सरकार के फैसले से परेशान कुछ लोग समाज में भ्रम और असंतोष फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का निर्णय किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और समान बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

वहीं, इस पूरे मामले पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था को सरकार के किसी फैसले से आपत्ति है तो उसे लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।

डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के किसी निर्णय का विरोध भी संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।

हालांकि, कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी बोर्ड को भंग करने या किसी नए प्राधिकरण के गठन से पहले सरकार को सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था, ताकि संबंधित पक्षों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

मदरसों से जुड़े सरकार के फैसले को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। भाजपा जहां इसे समान शिक्षा व्यवस्था की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस सरकार से फैसले से पहले सभी पहलुओं पर विचार करने की बात कह रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और गरमाने के आसार हैं।