पतंजलि योगपीठ में रक्षाबंधन पर सामाजिक समरसता का संदेश, स्वामी रामदेव ने बंधवाई राखी

पतंजलि योगपीठ में रक्षाबंधन पर सामाजिक समरसता का संदेश, स्वामी रामदेव ने बंधवाई राखी

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

पतंजलि योगपीठ में रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह, प्रेम और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ मनाया गया। इस अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने बहनों से राखी बंधवाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में पर्व की पारंपरिक भावना के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया गया।

स्वामी रामदेव ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज में प्रेम, एकता और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि इस पर्व की मूल भावना को व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने समाज में जाति, वर्ग और समुदाय के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने की अपील की। स्वामी रामदेव ने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति के प्रति समानता और सम्मान का भाव होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी जाति या समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

स्वामी रामदेव ने कहा कि वेद की दृष्टि में सभी लोगों के लिए समानता का भाव है। उन्होंने स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव को भी अनुचित बताते हुए कहा कि समाज में सभी को समान सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने रक्षाबंधन को इसी समानता और सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाने का अवसर बताया।

उन्होंने कहा कि दलित, शोषित और वंचित वर्ग हो या ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, किसी भी व्यक्ति का अपमान स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार किसी व्यक्ति का अपमान लोकतांत्रिक, संवैधानिक और सामाजिक मूल्यों के विपरीत है।

रक्षाबंधन के अवसर पर स्वामी रामदेव ने समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी प्रेम और सम्मान बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज की नींव आपसी विश्वास, समानता और भाईचारे पर टिकी होती है और प्रत्येक व्यक्ति को इन मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में योगदान देना चाहिए।

राजनीतिक दलों को संदेश देते हुए स्वामी रामदेव ने पक्ष और विपक्ष से आपसी वैमनस्य छोड़कर देशहित को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इन मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय हित सर्वोच्च रहना चाहिए।

उन्होंने एक अनूठा सुझाव देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को एक-दूसरे को राखी बांधकर आपसी सौहार्द का संदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद से लेकर सड़क तक लोकतंत्र, संविधान, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सर्वोच्च रखने का संकल्प लिया जाना चाहिए।

स्वामी रामदेव ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व समाज को जोड़ने और आपसी दूरी कम करने का संदेश देता है। ऐसे में इस पर्व की भावना को केवल परिवार तक सीमित न रखकर पूरे समाज में प्रेम, सद्भाव और एकजुटता के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

पतंजलि योगपीठ में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम इसी व्यापक संदेश का प्रतीक बना। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ सामाजिक समानता, आपसी सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की अपील ने कार्यक्रम को सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया।