स्थान : श्रीनगर
ब्यूरो रिपोर्ट


श्रीनगर में संस्कृत सप्ताह के अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के तत्वावधान में विशाल संस्कृत शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्कृत प्रेमियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के माध्यम से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों के संरक्षण का संदेश दिया गया।


शोभायात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और श्रीनगर नगर निगम की महापौर आरती भंडारी शामिल हुईं। अतिथियों ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।



संस्कृत शोभायात्रा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से शुरू हुई। यहां से शोभायात्रा सब्जी मंडी, गोलाबाजार, गणेश बाजार और पौड़ी बस अड्डे से होते हुए आगे बढ़ी। इस दौरान विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा के प्रति लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया।

शोभायात्रा राष्ट्रीय राजमार्ग, काला रोड, गुरुद्वारा रोड और हटवाल गली से होते हुए सराफा धर्मशाला पहुंची। मार्ग में जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और संस्कृत के उद्घोषों से पूरा वातावरण संस्कृतमय नजर आया।


शोभायात्रा में विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक झांकियां भी प्रस्तुत कीं। भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों पर आधारित इन झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने संस्कृत भाषा के महत्व को बताते हुए इसके अध्ययन और दैनिक जीवन में प्रयोग को बढ़ावा देने की अपील की। आयोजकों ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान और संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है।




उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रो. विनय कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन से तीन दिन पूर्व और तीन दिन बाद तक संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत सप्ताह का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना और विश्वभर में इसकी विशिष्ट पहचान स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है और इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा का विशाल भंडार मौजूद है।

प्रो. विनय कुमार ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत संस्थान संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। श्रीनगर में आयोजित शोभायात्रा के माध्यम से विद्यार्थियों और आमजन को संस्कृत से जोड़ने के साथ भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

