26 अनाज मंडियों की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

26 अनाज मंडियों की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

रिपोर्टर : पंकज सक्सेना
स्थान : हल्द्वानी

उत्तराखंड की 26 अनाज मंडियों में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मंडियों में जगह-जगह गंदगी, कूड़े के ढेर और दुर्गंध से व्यापारी और आढ़ती परेशान हैं। आरोप है कि सफाई व्यवस्था के लिए लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद धरातल पर हालात संतोषजनक नहीं हैं।

सफाई व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल ठेके को लेकर उठ रहा है। जानकारी के अनुसार प्रदेश की सभी 26 अनाज मंडियों की सफाई का ठेका भाजपा के पूर्व ओबीसी जिला अध्यक्ष नन्हे कश्यप को दिया गया है। बताया जा रहा है कि सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए करीब 40 से 45 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है।

इसके बावजूद मंडियों में सफाई व्यवस्था लगातार खराब होने के आरोप लग रहे हैं। इससे पहले भी मंडियों की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर खबरें प्रकाशित की गई थीं। खबरों के बाद हल्द्वानी मंडी में दो अतिरिक्त कर्मचारियों को बढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

कुमाऊं की सबसे बड़ी मंडी हल्द्वानी सब्जी मंडी में भी सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यहां वर्तमान में केवल चार कर्मचारियों के काम करने की बात सामने आ रही है। व्यापारियों का आरोप है कि नियमित और पर्याप्त सफाई नहीं होने के कारण मंडी परिसर में गंदगी और दुर्गंध बनी रहती है।

किच्छा मंडी में भी हालात अलग नहीं बताए जा रहे हैं। यहां भी जगह-जगह गंदगी का अंबार होने और पर्याप्त सफाई कर्मचारी नहीं होने की शिकायत सामने आई है। मौके पर केवल दो कर्मचारियों के काम करने की बात कही जा रही है, जिससे मंडी परिसर की पूरी सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

रुड़की, देहरादून और सितारगंज समेत प्रदेश की अन्य मंडियों में भी सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। गढ़वाल क्षेत्र की कई मंडियों में भी व्यापारियों को गंदगी और दुर्गंध की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सफाई के नाम पर बड़ी धनराशि खर्च की जा रही है तो उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा।

व्यापारियों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था खराब होने के बावजूद संबंधित ठेकेदार के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। न तो नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है और न ही खराब सफाई व्यवस्था के आधार पर भुगतान में कटौती की गई है। इससे मंडी परिषद की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पूरे मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा शासन में राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों को ठेके मिलने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित ठेकेदार और मंडी परिषद का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

अब निगाहें मंडी परिषद के अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह भी है कि यदि सफाई व्यवस्था में लगातार लापरवाही सामने आती है तो क्या संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी और क्या उसे आगामी टेंडर में फिर मौका दिया जाएगा। चर्चा है कि अगले सफाई टेंडर की तैयारी भी इसी ठेकेदार की ओर से की जा रही है। ऐसे में मंडी परिषद को सफाई व्यवस्था, भुगतान और ठेके की शर्तों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।