श्रीलंका के 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जाना उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल

श्रीलंका के 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जाना उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के तत्वावधान में आपदा प्रबंधन विषय पर आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत श्रीलंका के 40 सदस्यीय सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, तकनीकी नवाचारों और संस्थागत व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

यूएसडीएमए में अधिकारियों ने श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल को पूर्व चेतावनी व्यवस्था, मौसम आधारित जोखिम प्रबंधन, भूस्खलन न्यूनीकरण, तकनीकी संसाधनों के उपयोग और समुदाय की भागीदारी से संचालित आपदा प्रबंधन तंत्र के बारे में विस्तार से बताया। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी ली।

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियां आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर तैयारी और जोखिमों को पहले से समझने की मांग करती हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में आपदा प्रबंधन को केवल आपदा के बाद की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि जोखिम की पहचान, न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और विभागीय समन्वय को एकीकृत कर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में सूचना प्राप्त होने से लेकर राहत और बचाव कार्यों के संचालन तक विभिन्न स्तरों पर स्पष्ट समन्वय व्यवस्था बनाई गई है। उन्होंने राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों, घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस), बहु-स्रोत चेतावनी तंत्र और तकनीक आधारित सूचना एवं निर्णय सहायता प्रणालियों की जानकारी साझा की।

मौसम विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा ने उत्तराखंड में मौसम संबंधी जोखिमों की निगरानी और पूर्व चेतावनी के लिए अपनाई जा रही वैज्ञानिक व्यवस्थाओं से प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उपग्रह आधारित निगरानी, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र और स्वचालित वर्षामापी समेत आधुनिक उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों का लगातार विश्लेषण किया जाता है। रियल टाइम मौसम संबंधी सूचनाओं के आधार पर अलग-अलग अवधि के पूर्वानुमान और प्रभाव आधारित चेतावनियां तैयार की जाती हैं।

उत्तराखंड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) के जियोलॉजिस्ट डॉ. रघुवीर नेगी ने राज्य में भूस्खलन के जोखिम को कम करने के लिए किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, भू-वैज्ञानिक और भू-तकनीकी अध्ययन, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस आधारित विश्लेषण, ड्रोन सर्वेक्षण और ढलानों की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर जोखिम वाले क्षेत्रों में जल निकासी सुधारने, ढलानों को स्थिर करने और आवश्यक इंजीनियरिंग उपायों का निर्धारण किया जाता है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन प्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। अत्यधिक बारिश और भूस्खलन की आशंका वाले श्रीलंका के लिए उत्तराखंड में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं को प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से उपयोगी और अध्ययन योग्य बताया। इस दौरान संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एपी सिंह, डॉ. एमके भंडारी समेत अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन तंत्र : सुमन

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर सीखने, अनुभव साझा करने और नई कार्यप्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के अधिकारियों के साथ संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान आपदा जोखिमों से निपटने की तैयारियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्थागत व्यवस्थाओं, तकनीकी नवाचारों और जमीनी अनुभवों को साझा करने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही प्रभावी प्रणालियों को समझना भी राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत करेगा। ऐसे कार्यक्रम भविष्य की आपदाओं के प्रति अधिक सक्षम, समन्वित और लचीली व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।