स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा चंपावत के बूँगादुर्गापीपल तोक से सामने आई तस्वीरें बच्चों की मुश्किलों और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक सुरक्षित पहुंच की चुनौती को बयां कर रही हैं। यहां बच्चे रोजाना करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर ककनई इंटर कॉलेज पढ़ने पहुंचते हैं। बरसात के मौसम में उनकी राह और भी खतरनाक हो जाती है।


ग्रामीणों के अनुसार बूँगादुर्गापीपल नदी बारिश के दौरान उफान पर रहती है। यही नदी आगे चलकर नंधोर नदी के नाम से जानी जाती है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए तेज बहाव के बीच नदी पार करनी पड़ती है, जिससे हर दिन हादसे का खतरा बना रहता है।



ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान नदी का बहाव इतना तेज हो जाता है कि बच्चों को नदी पार करते समय अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। ऐसे में अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजते समय चिंतित रहते हैं और उनके सकुशल घर लौटने का इंतजार करते हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार मांग उठाए जाने के बावजूद बूँगादुर्गापीपल तोक से ककनई तक सुरक्षित रास्ते और नदी पर पुल की व्यवस्था नहीं हो पाई है। उनका कहना है कि मामला मुख्यमंत्री की अपनी विधानसभा क्षेत्र का होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और अपने विधायक पुष्कर सिंह धामी से इस स्वतंत्रता दिवस पर विशेष मांग की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के बच्चों को इस बार “शिक्षा तक सुरक्षित पहुंचने की आजादी” दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने के लिए मजबूर न होना पड़े।


ग्रामीणों ने बूँगादुर्गापीपल तोक से ककनई तक पक्का रास्ता बनाने के साथ ही नदी पर पैदल पुल अथवा झूला पुल का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से बच्चों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी बरसात के दौरान सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी।



ग्रामीणों ने कहा कि सरकार की “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसी मुहिम तभी सार्थक होगी, जब बेटियां सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार तभी प्रभावी होगा, जब बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता और जरूरी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।
क्षेत्र के लोगों ने शासन-प्रशासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से खतरा और अधिक बढ़ जाता है, इसलिए पुल निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाना चाहिए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर मुख्यमंत्री और शासन-प्रशासन क्या संज्ञान लेते हैं और छात्र-छात्राओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं। क्या इस बरसात के बाद बच्चों को नदी पार कर स्कूल जाने के जोखिम से मुक्ति मिल पाएगी, यह आने वाला समय बताएगा।

