भू-कानून उल्लंघन पर डीएम सख्त, सतबूंगा की 250 वर्ग मीटर भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश

भू-कानून उल्लंघन पर डीएम सख्त, सतबूंगा की 250 वर्ग मीटर भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश

स्थान : नैनीताल
रिपोर्टर : संजय जोशी

जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल ने भू-कानून के उल्लंघन के एक मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए ग्राम सतबूंगा स्थित 250 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक राजस्व कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मामले की जांच उपजिलाधिकारी नैनीताल द्वारा की गई, जिसमें सामने आया कि श्रीमती पूनम त्रिखा, निवासी बल्लभगढ़ (हरियाणा), के नाम ग्राम खपराड़ में श्रेणी-1(ग) की 500 वर्ग मीटर भूमि पहले से राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद उनके पति राकेश त्रिखा द्वारा ग्राम सतबूंगा में अतिरिक्त 250 वर्ग मीटर भूमि क्रय की गई।

सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से दावा किया गया कि पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे हैं, इसलिए भूमि क्रय को नियमों के अनुरूप माना जाए। हालांकि, जिला शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष कहा कि दोनों का विधिक रूप से विवाह-विच्छेद नहीं हुआ है और संबंधित 500 वर्ग मीटर भूमि आज भी श्रीमती पूनम त्रिखा के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है।

जिला शासकीय अधिवक्ता ने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में पति द्वारा अतिरिक्त भूमि की खरीद भू-कानून के तहत निर्धारित सीमा का उल्लंघन है। इसलिए यह भूमि क्रय वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

अभिलेखों, जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल ने ग्राम सतबूंगा स्थित 250 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश पारित किया। इस निर्णय को भू-कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिए हैं कि संबंधित भूमि की राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियां कराई जाएं तथा नियमानुसार भूमि का कब्जा राज्य सरकार के पक्ष में लिया जाए। साथ ही आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने को कहा गया है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भू-कानून के उल्लंघन के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। नियमों के विरुद्ध भूमि क्रय या हस्तांतरण के मामलों में जांच के बाद विधिसम्मत कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि राज्य के भूमि कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके।