

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर :अशोक सरकार

उत्तराखंड वन विकास निगम की सार्वजनिक नीलामी में खरीदे गए शीशम के एक पेड़ को लेकर विवाद सामने आया है। खटीमा के शिव कॉलोनी निवासी एवं लक्की टिम्बर फर्म के संचालक सचिन ग्रोवर ने आरोप लगाया है कि नीलामी में खरीदा गया उनका पेड़ विभागीय मिलीभगत से कथित रूप से काटकर दूसरे व्यक्ति द्वारा उठा लिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


सचिन ग्रोवर के अनुसार उन्होंने 11 जून 2026 को उत्तराखंड वन विकास निगम की सार्वजनिक नीलामी में खटीमा डिपो की लॉट संख्या 275/24-25 के तहत एक सूखा शीशम का पेड़ 21 हजार रुपये में खरीदा था। उनका कहना है कि उन्होंने निर्धारित समय पर जमानत राशि जमा करने के साथ ही 15 जुलाई 2026 को पेड़ की पूरी बकाया धनराशि भी निगम के खाते में जमा कर दी थी।



व्यापारी का आरोप है कि 17 जुलाई को उन्हें जानकारी मिली कि संबंधित शीशम के पेड़ को 3 जुलाई को ही कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर काटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से दूसरी टाल पर पहुंचा दिया गया। उनका कहना है कि यह पूरा मामला गंभीर अनियमितता और विभागीय लापरवाही की ओर इशारा करता है।


मामले को लेकर सचिन ग्रोवर ने उपजिलाधिकारी तुषार सैनी को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कथित रूप से शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई करने के साथ ही पेड़ ले जाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देने की भी मांग की है।

उपजिलाधिकारी तुषार सैनी ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद उसे आवश्यक कार्रवाई के लिए उत्तराखंड वन विकास निगम को भेज दिया गया है। वहीं वन विकास निगम के डीएलएम विशन लाल आर्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आबिद टिम्बर द्वारा धोखे से संबंधित पेड़ काटकर ले जाने की बात सामने आई है। हालांकि उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।


इस मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि संबंधित पेड़ कथित रूप से गलत तरीके से काटा गया था, तो उसके लिए विक्रय निकासी रवन्ना किस आधार पर जारी किया गया। दूसरी ओर, आबिद टिम्बर के स्वामी से इस संबंध में पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मीडिया के सवालों पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।


फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार है और संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य व्यक्तियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

