किसानों की उपज अब पहुंचेगी सीमा पर तैनात जवानों तक, उद्यान विभाग ने ITBP और SSB से किया एमओयू

किसानों की उपज अब पहुंचेगी सीमा पर तैनात जवानों तक, उद्यान विभाग ने ITBP और SSB से किया एमओयू

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में किसानों की आय बढ़ाने और उनकी उपज के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की मौजूदगी में उद्यान विभाग ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस पहल के तहत प्रदेश के किसानों से फल और सब्जियां खरीदकर दोनों केंद्रीय सुरक्षा बलों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

एमओयू के तहत उद्यान विभाग किसानों से सीधे ताजे फल और सब्जियां खरीदेगा और उन्हें ITBP तथा SSB तक पहुंचाने की व्यवस्था करेगा। इस प्रक्रिया से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक भरोसेमंद और स्थायी बाजार मिलेगा, जबकि बिचौलियों की भूमिका भी काफी हद तक समाप्त होगी।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस व्यवस्था से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है और यह समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ केवल किसानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीमा पर कठिन परिस्थितियों में तैनात ITBP और SSB के जवानों को भी ताजे, गुणवत्तापूर्ण और ऑर्गेनिक फल एवं सब्जियां उपलब्ध हो सकेंगी। इससे जवानों को बेहतर पोषण मिलने के साथ स्थानीय कृषि उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनकी उपज के लिए दीर्घकालिक और सुनिश्चित बाजार तैयार करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मॉडल से प्रदेश के अधिक से अधिक किसान जुड़ेंगे और कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, विपणन और आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसानों को उत्पादन के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

राज्य सरकार का मानना है कि यह समझौता किसानों और सुरक्षा बलों, दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। एक ओर किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम और स्थायी बाजार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात जवानों तक उत्तराखंड के ताजे और ऑर्गेनिक कृषि उत्पाद नियमित रूप से पहुंच सकेंगे।