

स्थान – हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

नया उदासीन अखाड़े को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पंजाब के मूल डेरे से जुड़े संत गणेश दास उदासीन ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी को ज्ञापन सौंपकर अपने बहिष्कार को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने बहिष्कार को अनुचित बताते हुए कहा कि इससे उनकी धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।


संत गणेश दास ने ज्ञापन में कहा कि उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है और इससे उनकी सामाजिक एवं धार्मिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने अखाड़ा परिषद से मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर बहिष्कार समाप्त करने की मांग की।



इसके साथ ही संत गणेश दास ने नया उदासीन अखाड़े के मुख्य महंत भगत राम पर अखाड़े की भूमि और अन्य संपत्तियों की बिक्री के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराए जाने की मांग करते हुए कहा कि यदि अनियमितताएं हुई हैं तो दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।


वहीं, नया उदासीन अखाड़े के मुख्य महंत भगत राम ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अखाड़े की किसी भी संपत्ति की बिक्री नियमों के विरुद्ध नहीं हुई है और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार तथा तथ्यहीन हैं।

इस मामले को लेकर धार्मिक संत समाज में भी चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद पर टिकी हैं कि परिषद बहिष्कार की मांग और लगाए गए आरोपों पर क्या निर्णय लेती है।


