

स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

जिले के पर्वतीय और ठंडे इलाकों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला लिगड़ा इन दिनों ग्रामीणों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। ग्रामीण कठिन परिस्थितियों में जंगलों से लिगड़ा एकत्र कर स्थानीय बाजारों में बेच रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। वहीं, इसकी बढ़ती मांग से ग्रामीणों का उत्साह भी बढ़ा है।


भिंगराड़ा क्षेत्र के निवासी प्रकाश चंद्र ने बताया कि वह अन्य ग्रामीणों के साथ प्रतिदिन जंगलों में जाकर लिगड़ा तोड़कर लाते हैं। उन्होंने कहा कि यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि दुर्गम पहाड़ी रास्तों के साथ जंगलों में खून चूसने वाली जोंकों का भी सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद ग्रामीण मेहनत से लिगड़ा एकत्र कर बाजार तक पहुंचाते हैं।


प्रकाश चंद्र के अनुसार, लोहाघाट बाजार में लिगड़े की अच्छी मांग है और लोग इसे पसंद से खरीद रहे हैं। इससे न केवल उन्हें बल्कि क्षेत्र के कई अन्य ग्रामीणों को भी मौसमी रोजगार मिल रहा है। हालांकि, कई बार पर्याप्त खरीदार नहीं मिलने से निराशा भी हाथ लगती है।

ग्रामीणों का कहना है कि लिगड़ा केवल स्वादिष्ट सब्जी ही नहीं, बल्कि पारंपरिक रूप से इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। प्रकाश चंद्र के मुताबिक, यह शुगर और पेट संबंधी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है, जिसके कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि लिगड़ा जैसे वन उत्पादों के विपणन और संरक्षण की बेहतर व्यवस्था की जाए तो यह पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और पलायन जैसी समस्याओं पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

फिलहाल, जंगलों की कठिन राहों से गुजरकर लिगड़ा एकत्र करने वाले ग्रामीण अपनी मेहनत का फल बाजार में मिल रही अच्छी कीमत और बढ़ती मांग के रूप में पा रहे हैं। यह वन उपज आज चंपावत के पर्वतीय क्षेत्र में ग्रामीणों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद बनकर उभरी है।



