बनबसा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर विवाद, पीड़ित ने लगाए पक्षपात और रिश्वत के आरोप

बनबसा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर विवाद, पीड़ित ने लगाए पक्षपात और रिश्वत के आरोप

स्थान – बनबसा (चंपावत)
रिपोर्टर – अशोक सरकार

चंपावत जिले के बनबसा क्षेत्र में शारदा मुख्य नहर के किनारे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। सिंचाई विभाग ने धनुष पुल के समीप गोपाल राम द्वारा बनाए जा रहे एक अर्ध-पक्के मकान को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के बाद पीड़ित ने विभाग पर पक्षपात और रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि विभाग ने आरोपों को निराधार बताते हुए पूरी कार्रवाई को नियमानुसार बताया है।

यह मामला तहसील पूर्णागिरि के बनबसा क्षेत्र का है, जहां सिंचाई विभाग की टीम ने शारदा मुख्य नहर के किनारे कथित अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत कार्रवाई की। विभाग की ओर से जेसीबी मशीन से अर्ध-पक्का निर्माण ध्वस्त किए जाने के बाद मौके पर विवाद की स्थिति बन गई।

पीड़ित गोपाल राम का कहना है कि वह वर्षों से उक्त स्थान पर खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विभाग ने केवल उन्हें निशाना बनाया है, जबकि बनबसा बैराज से लाल कोठी तक नहर किनारे बने कई बड़े भवन और कोठियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे 25 हजार रुपये की रिश्वत ली गई थी।

वहीं सिंचाई विभाग के उपखंड अधिकारी (एसडीओ) प्रशांत कुमार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान का हिस्सा है। उनके अनुसार बनबसा बैराज से लाल कोठी तक सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं और मुनादी भी कराई गई है।

एसडीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि गोपाल राम को पहले दो बार नोटिस जारी कर पक्का निर्माण नहीं करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने पर उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार नियमानुसार कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी अतिक्रमणों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान विभागीय कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उनकी बाइक की चाबी भी छीन ली गई। फिलहाल मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन शिकायतों और आरोपों की जांच कर क्या निष्कर्ष निकालता है तथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे किस प्रकार जारी रहती है।