

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शाइन अवी लर्निंग के “समावेशी शिक्षा मिशन-2030” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग करिकुलम पर आधारित पुस्तकों और शिक्षण सामग्री का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इस पहल को शिक्षा को अधिक सरल, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।


मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना भी है।



उन्होंने जानकारी दी कि उत्तराखंड में वर्तमान में लगभग 5,800 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे विभिन्न विद्यालयों में पंजीकृत हैं। इनके लिए राज्य के 11 विशेष विद्यालयों के माध्यम से 1,300 से अधिक बच्चों को विशेष शिक्षण, पुनर्वास और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और विजुअल लर्निंग सामग्री के माध्यम से विशेष बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में नवाचार और तकनीक के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए तैयार की गई शिक्षण सामग्री उन्हें बेहतर तरीके से सीखने और अपनी क्षमताओं का विकास करने में सहायक सिद्ध होगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समावेशी शिक्षा से जुड़े सभी संस्थानों, शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों से ही हर बच्चे तक समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई जा सकती है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिससे वह केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि “समावेशी शिक्षा मिशन-2030” इस दिशा में एक प्रभावी और दूरगामी पहल साबित होगा।

