

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड सरकार ने विधि-विवादित किशोरों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरिद्वार में राज्य के पहले राजकीय “प्लेस ऑफ सेफ्टी (किशोर)” भवन के निर्माण का शुभारंभ किया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने विधि-विधान के साथ भूमि पूजन कर परियोजना का शिलान्यास किया।


करीब 555.15 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन 50 किशोरों की क्षमता वाला होगा। भवन के निर्माण के बाद उत्तराखंड में पहली बार विधि-विवादित किशोरों के लिए अलग से राजकीय प्लेस ऑफ सेफ्टी की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनके पुनर्वास और सुधार की व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकेगी।



शिलान्यास कार्यक्रम हरिद्वार स्थित राजकीय विशेष गृह परिसर में आयोजित किया गया। इस दौरान मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत अब तक विशेष गृह और प्लेस ऑफ सेफ्टी एक ही भवन में संचालित किए जा रहे थे, लेकिन बढ़ती जरूरतों और कार्य की संवेदनशीलता को देखते हुए अलग भवन का निर्माण आवश्यक हो गया था।


उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 50 क्षमता वाले आधुनिक राजकीय प्लेस ऑफ सेफ्टी के निर्माण को मंजूरी दी है। भवन के तैयार होने के बाद यह उत्तराखंड का पहला ऐसा सरकारी संस्थान होगा, जो विशेष रूप से विधि-विवादित किशोरों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए समर्पित रहेगा।

मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल किशोरों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और सकारात्मक वातावरण देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इसके लिए संस्थान में विभिन्न प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास संबंधी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


उन्होंने बताया कि वर्तमान में संचालित संस्थाओं में किशोरों को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। कैनवास पेंटिंग, फाइल फोल्डर निर्माण, भीमल पेंटिंग सहित विभिन्न कौशल आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व विकास का प्रयास किया जा रहा है।



सरकार का मानना है कि इस नई परियोजना से विधि-विवादित किशोरों के पुनर्वास की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
राजकीय प्लेस ऑफ सेफ्टी भवन के निर्माण को बाल संरक्षण और किशोर न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे किशोरों को सकारात्मक माहौल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उनके बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रखी जाए।

