

स्थान : कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल)
ब्यूरो रिपोर्ट

कोटद्वार की लाइफलाइन माने जाने वाले लालढांग–चिल्लरखाल मोटरमार्ग को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वन विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को कार्यदाई संस्था नामित किए जाने के आदेश जारी होने के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं।


वन विभाग के निर्णय के बाद जहां भाजपा इसे प्रदेश सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे आगामी चुनावों को देखते हुए उठाया गया कदम बताया है। दोनों दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर दिए हैं।


कांग्रेस नेताओं सुनील सेमवाल और महावीर नेगी ने कहा कि लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग को लेकर कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही पहल शुरू हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 में कांग्रेस सरकार के दौरान इस मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए सात करोड़ रुपये की पहली किस्त स्वीकृत की गई थी और पीडब्ल्यूडी के माध्यम से निर्माण कार्य भी शुरू कराया गया था।


कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इस परियोजना को रोक दिया, जिसके चलते यह महत्वपूर्ण योजना वर्षों तक अधर में लटकी रही। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सरकार ने उसी समय कार्य को आगे बढ़ाया होता तो यह मार्ग बनकर तैयार हो चुका होता और जनता को इसका लाभ मिल रहा होता।

वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार ने लंबी प्रतीक्षा के बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाया है। भाजपा इसे क्षेत्र के विकास और जनता की सुविधा से जुड़ी बड़ी उपलब्धि बता रही है।

भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस इस विकास कार्य का श्रेय लेने के लिए जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। पार्टी नेताओं ने कहा कि वर्तमान सरकार ने वन संबंधी अड़चनों को दूर करते हुए मार्ग निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।


लालढांग–चिल्लरखाल मोटरमार्ग लंबे समय से क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। अब कार्यदाई संस्था नामित होने के बाद लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर उतरेगी। हालांकि, निर्माण कार्य की गति और समयसीमा को लेकर अभी तस्वीर साफ होना बाकी है।

